Thursday, October 29, 2026

Korba News: मनोज मरावी को जान से मारने की कथित धमकी, गोंगपा ने पुलिस से की कार्रवाई की मांग; थाने के घेराव की चेतावनी

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) के युवा मोर्चा के प्रदेश सचिव एवं विधि छात्र मनोज कुमार मरावी को कथित तौर पर जान से मारने की धमकी दिए जाने का मामला सामने आया है। इस मामले को लेकर गोंगपा ने नाराजगी जताते हुए पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

गोंगपा के कोरबा जिला अध्यक्ष विद्वान सिंह मरकाम ने आरोपी अभिषेक उर्फ पिंकू माहेश्वरी की भूमिका की जांच करने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की है। हालांकि, इस मामले में पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया और जांच की वर्तमान स्थिति की जानकारी सामने नहीं आई है।

गोंगपा जिला अध्यक्ष ने पुलिस प्रशासन से की कार्रवाई की मांग

विद्वान सिंह मरकाम ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने या किसी को जान से मारने की धमकी देकर भय का माहौल बनाने का अधिकार नहीं है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से शिकायत, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। पार्टी ने आरोपी से पूछताछ और आवश्यकता के अनुसार अन्य वैधानिक कदम उठाने की भी मांग की है।

कार्रवाई नहीं हुई तो थाने के घेराव की चेतावनी

गोंगपा जिला अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि पुलिस प्रशासन शिकायत पर समय रहते उचित कार्रवाई नहीं करता है, तो पार्टी आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। आवश्यकता पड़ने पर कार्यकर्ता संबंधित थाने का घेराव करेंगे। उन्होंने आगे उग्र आंदोलन की रणनीति अपनाने की भी बात कही।

मरकाम ने पुलिस प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए समय रहते उचित कदम उठाने की अपील की, ताकि विवाद बढ़ने और आंदोलन की स्थिति बनने से रोका जा सके।

निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग

गोंगपा ने कहा कि पार्टी अपने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है। पार्टी पदाधिकारियों के मुताबिक, धमकी जैसे मामलों में निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई जरूरी है, ताकि आम लोगों में कानून-व्यवस्था को लेकर भरोसा बना रहे।

फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई संबंधी जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।