नई दिल्ली: महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप सिंडिकेट मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चार्जशीट से बड़ा खुलासा हुआ है। टीवी प्रेजेंटर और बिग बॉस की पूर्व कंटेस्टेंट शेफाली बग्गा ने कथित तौर पर महादेव बेटिंग ऐप के प्रमोशन से मिली रकम में से 1.20 करोड़ रुपये स्वेच्छा से ED को सौंप दिए हैं। एजेंसी के मुताबिक, अवैध बेटिंग ऐप के प्रमोशनल वीडियो बनाने के लिए शेफाली बग्गा को कुल 1.5 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था।
ED की चार्जशीट में शेफाली बग्गा का नाम
महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप सिंडिकेट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही ED ने छत्तीसगढ़ की रायपुर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट के मुताबिक, जांच के दौरान सामने आया कि शेफाली बग्गा को महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप के प्रमोशनल वीडियो तैयार करने के बदले करीब 1.5 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था।
ED से पूछताछ के बाद शेफाली बग्गा ने एजेंसी को 1.20 करोड़ रुपये वापस सौंप दिए। बताया गया है कि उन्होंने जांच के दौरान यह दावा किया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि जिस ऐप का वह प्रचार कर रही थीं, वह अवैध तरीके से संचालित किया जा रहा था।
महादेव ऐप के प्रमोशन के बदले मिली थी रकम
जांच एजेंसी के अनुसार, शेफाली बग्गा की सोशल मीडिया पर बड़ी फैन फॉलोइंग है और इसी वजह से उन्हें बेटिंग ऐप के प्रचार के लिए जोड़ा गया था। ED की जांच में कथित तौर पर यह बात सामने आई कि ऐप के प्रमोशनल कंटेंट के लिए उन्हें बड़ी रकम का भुगतान किया गया।
अवैध बेटिंग सिंडिकेट से मिली कथित रकम को वापस किए जाने का यह मामला जांच के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
42 लोगों के खिलाफ ED ने दाखिल की चार्जशीट
ED ने महादेव बेटिंग ऐप मामले में हालिया कार्रवाई के तहत 42 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इसमें Ebix ग्रुप के चेयरमैन विकास गर्ग का नाम भी शामिल है। एजेंसी ने विकास गर्ग को गिरफ्तार किया था और उनकी गिरफ्तारी से पहले करीब 940 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां कुर्क किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
ED का आरोप है कि विकास गर्ग कथित तौर पर महादेव बेटिंग सिंडिकेट से प्राप्त अपराध की आय को मास्टरमाइंड हरिशंकर तिब्रेवाल के जरिए अपनी कंपनियों तक पहुंचा रहे थे।
कंपनियों के शेयरों में हेरफेर का भी आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार, हरिशंकर तिब्रेवाल ने FPI और बॉन्ड के माध्यम से महादेव बेटिंग सिंडिकेट और स्काई एक्सचेंज बेटिंग सिंडिकेट से कथित तौर पर हासिल सैकड़ों करोड़ रुपये विकास गर्ग की कंपनियों तक पहुंचाए।
ED का आरोप है कि विकास गर्ग और हरिशंकर तिब्रेवाल ने कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर कथित अपराध की आय का इस्तेमाल गर्ग की कई लिस्टेड कंपनियों के शेयरों की कीमतों में हेरफेर के लिए किया।
विकास गर्ग दिल्ली भाजपा के सदस्य भी रहे थे, लेकिन उनकी गिरफ्तारी के बाद उन्हें पार्टी से हटा दिया गया था।










