
MDH मसाले के ऐड में दिखने वाले दादा जी को तो हर कोई जानता है। आइए आज हम आपको इन दादा (MDH Owner) जी के बारे में कुछ रोचक बाते बताते हैं, जो शायद ही आपने सुनी होंगी।
नई दिल्ली: MDH मसाले के ऐड में दिखने वाले दादा जी को तो हर कोई जानता है। आज सुबह 5:38 पर उन्होंने अंतिम सांस ली है। कोरोना से ठीक होने के बाद हार्ट अटैक से उनका निधन हुआ है। आइए आज हम आपको इन दादा (MDH Owner) जी के बारे में कुछ रोचक बाते बताते हैं जो शायद ही आपने सुनी होंगी। इनका जन्म पाकिस्तान में हुआ था, बता दें कि साल 1919 में पाकिस्तान के सियालकोट से शुरू की एक छोटी सी दुकान उनके पिता चुन्नी लाल ने खोली थी, आज ये छोटी सी 1500 करोड़ रुपए के साम्राज्य में तब्दील हो चुकी है।
आइए धरमपाल गुलाटी के बारे में जानिए कुछ रोमांचक बातें-
पाकिस्तान में हुआ था जन्म
गुलाटी का जन्म 27 मार्च, 1923 को सियालकोट (पाकिस्तान) में हुआ था, 1947 में देश विभाजन के बाद वह भारत आ गए तब उनके पास महज 1,500 रुपये थे।

5वीं कक्षा तक की थी पढ़ाई
धरमपाल गुलाटी कक्षा पांचवीं तक पढ़े हैं। आगे की पढ़ाई के लिए वह स्कूल नहीं गए उन्होंने भले ही किताबी शिक्षा अधिक ना ली हो, लेकिन कारोबार में बड़े-बड़े दिग्गज उनका लोहा मानते हैं।
दिल्ली में चलाते थे तांगा
धर्मपाल गुलाटी के सामने दिल्ली आकर पैसा कमाना सबसे बड़ी चुनौती थी। उन दिनों धर्मपाल की जेब में 1500 रुपये ही बचे थे। पिता से मिले इन 1500 रुपये में से 650 रुपये का धर्मपाल ने घोड़ा और तांगा खरीद लिया और रेलवे स्टेशन पर तांगा चलाने लगे। कुछ दिनों बाद उन्होंने तांगा भाई को दे दिया और करोलबाग की अजमल खां रोड पर ही एक छोटा सा खोखा लगाकर मसाले बेचना शुरू किया।
सबसे ज्यादा सैलरी वाली सीईओ थे
यूरोमॉनिटर के मुताबिक, धरमपाल गुलाटी एफएमसीजी सेक्टर के सबसे ज्यादा कमाई वाले सीईओ थे। सूत्रों ने बताया कि पिछले साल उन्हें 2018 में 25 करोड़ रुपये इन-हैंड सैलरी मिलती थी।
दान में भी थे आगे
गुलाटी अपनी सैलरी का करीब 90 फीसदी हिस्सा दान कर देते थे। वह 20 स्कूल और 1 हॉस्पिटल भी चला रहे थे। इसके अलावा वह समय-समय पर जरूरतमंद लोगों की भी मदद करते रहते थे।
सबसे ज्यादा उम्र वाले ऐड स्टार थे
धरमपाल गुलाटी ने बुढ़ापे में भी अपने सभी मसालों का ऐड खुद ही करते थे। अक्सर आपने उन्हें टीवी पर अपने मसालों के बारे में बताते देखा होगा उन्हें दुनिया का सबसे उम्रदराज ऐड स्टार माना जाता है। इसके अलावा वह अपने मसालों को स्वादिष्ट बनाने के लिए कई खास तकनीक का भी इस्तेमाल करते थे।











