Friday, April 10, 2026

PWD भ्रष्टाचार मामला: पूर्व गृह मंत्री ननकी राम कंवर ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र, मुख्य अभियंता पर CBI जांच की मांग

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व गृह मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता ननकी राम कंवर की एक चिट्ठी ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। कंवर ने राज्य के मुख्य सचिव विकासशील को पत्र लिखकर लोक निर्माण विभाग (PWD) के मुख्य अभियंता विजय कुमार भतपहरी पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं और पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग की है।

बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप

पूर्व गृह मंत्री ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि विजय कुमार भतपहरी ने PWD में विभिन्न पदों पर रहते हुए नियमों को दरकिनार कर अपने चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया और कमीशनखोरी के जरिए अवैध कमाई की। इससे विभाग को आर्थिक नुकसान हुआ और शासन की छवि भी प्रभावित हुई।

ACB और EOW में पहले से दर्ज हैं केस

पत्र में उल्लेख किया गया है कि भतपहरी के खिलाफ ACB और EOW रायपुर में पहले से ही गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं।

  • वर्ष 2011 (अपराध क्रमांक 56/2011) में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1)(ई), 13(2) के तहत मामला दर्ज हुआ।

  • वर्ष 2015 (अपराध क्रमांक 45/2015) में IPC की धारा 420, 120बी एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी), 13(2) के तहत दूसरा मामला दर्ज किया गया।

कंवर का आरोप है कि राजनीतिक प्रभाव के चलते इन मामलों में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

डीपीसी और पदोन्नति प्रक्रिया पर सवाल

ननकी राम कंवर ने PWD की डीपीसी और पदोन्नति प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अधीक्षण अभियंता सिविल की समीक्षा प्रक्रिया वर्ष 2010 से लंबित है, जबकि कई भ्रष्ट अधिकारियों को लंबित मामलों को छिपाकर पदोन्नति दी गई।

2003 सड़क निर्माण घोटाले का जिक्र

पत्र में मानपुर–संबलपुर मार्ग (51 किमी) निर्माण का भी उल्लेख है, जहां 695.94 लाख की स्वीकृति के विरुद्ध लगभग 10 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। जांच में 4.37 करोड़ की अतिरिक्त राशि खर्च और मस्टर रोल गायब होने की बात सामने आई थी, इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।

CBI जांच और पद से हटाने की मांग

पूर्व गृह मंत्री ने मुख्य सचिव से मांग की है कि विजय कुमार भतपहरी को तत्काल पद से हटाया जाए, लंबित सभी मामलों की निष्पक्ष जांच हो और शासन को हुए नुकसान की वसूली की जाए। साथ ही पूरे प्रकरण की CBI जांच कराई जाए।

इस पत्र के सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासन में नई बहस शुरू हो गई है। अब यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकार और प्रशासन इस पर क्या कदम उठाते हैं।