Monday, September 28, 2026

SECL Kusmunda News: बिना बसाहट मकान खाली कराने का आरोप, 200 प्रभावित परिवारों ने किया विरोध; दंडवत न्याय यात्रा का ऐलान

कोरबा, 28 सितंबर। एसईसीएल कुसमुंडा परियोजना से प्रभावित दर्री तहसील के मसाहती ग्राम चंद्रनगर-जटराज के करीब 200 परिवारों ने बिना वैकल्पिक बसाहट की व्यवस्था किए मकान खाली कराने का दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीन अलग-अलग चरणों में कुसमुंडा परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी, लेकिन कई वर्ष बीतने के बाद भी सभी प्रभावित परिवारों को पुनर्वास और बसाहट की सुविधा नहीं मिल सकी है।

200 परिवारों ने लगाया मकान खाली कराने के दबाव का आरोप

ग्रामीणों के अनुसार, उनकी जमीन का अधिग्रहण 1978-79, 1982-83, 1984-85 और अंतिम चरण में 2010 में कुसमुंडा परियोजना के लिए किया गया था। उनका दावा है कि अंतिम चरण के अधिग्रहण के करीब 16 साल बाद भी कई परिवार बसाहट की सुविधा का इंतजार कर रहे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि अब उन्हें मकान खाली करने के लिए दबाव का सामना करना पड़ रहा है। मकान नहीं हटाने पर डोजरीकरण की कार्रवाई किए जाने की बात कहे जाने का भी उन्होंने आरोप लगाया है।

वैकल्पिक व्यवस्था के बिना बेदखली पर सवाल

प्रभावित परिवारों का कहना है कि दबाव के चलते कुछ लोगों को अपने मकान तोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार, पहले मकान हटाने और बाद में बसाहट व मुआवजे की व्यवस्था करने की मौखिक बात कही जा रही है।

ग्रामीणों का सवाल है कि जब प्रस्तावित बसाहट स्थल पर सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं, तो परिवार वहां जाकर कैसे रहेंगे।

बारिश के बीच बढ़ी परिवारों की चिंता

ग्रामीणों ने बरसात के मौसम में मकान खाली कराने को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। वहीं महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के सामने रहने और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी खड़ी हो सकती हैं।

ग्रामीणों के मुताबिक, वर्ष 1978 से 2010 के बीच कोयला उत्खनन के लिए जमीन देने के बावजूद कई परिवार अभी भी पुनर्वास और बसाहट की सुविधा का इंतजार कर रहे हैं।

दंडवत न्याय यात्रा निकालने की घोषणा

मकान खाली कराने के कथित दबाव के विरोध में ग्रामीणों ने 28 सितंबर को दंडवत न्याय यात्रा निकालने की घोषणा की है। ग्रामीणों के अनुसार, यात्रा सुबह 9 बजे घंटाघर चौक से शुरू होकर कलेक्टर कार्यालय तक जाएगी।

इसमें महिलाओं, पुरुषों, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों समेत करीब 200 लोगों के शामिल होने की बात कही गई है।

पहले बसाहट, फिर मकान हटाने की मांग

ग्रामीणों ने मांग की है कि बिना वैकल्पिक बसाहट के मकान खाली कराने और डोजरीकरण की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों को पहले सभी जरूरी सुविधाओं से युक्त वैकल्पिक बसाहट उपलब्ध कराई जाए और नए मकान के निर्माण के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समाधान कराने की मांग की है। मकान खाली कराने और पुनर्वास को लेकर लगाए गए आरोपों पर संबंधित प्रशासनिक अथवा एसईसीएल प्रबंधन का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।