Tuesday, August 4, 2026

कहीं 10 फीट गड्ढा तो कहीं खेतों-घरों में दरार:खिसकते जोशीमठ से गुजरेगी चारधाम यात्रा, लाखों गाड़ियां आईं तो क्या होगा

जोशीमठ.22 अप्रैल 2023 से चारधाम यात्रा शुरू होने वाली है। करीब सवा लाख लोग रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। चारधाम यात्रा के रूट पर ही जोशीमठ भी पड़ता है। यात्रा शुरू होने में बस दो महीने बचे हैं, लेकिन बद्रीनाथ हाईवे पर जगह-जगह गड्ढे बन जाने और जल स्त्रोत फूटने की खबरें आ रही हैं। सड़कों पर ये ताजे गड्ढे 10 फीट तक भी गहरे हैं।

20 फरवरी को जोशीमठ में रेलवे गेस्ट हाउस के पास करीब 10 फीट गहरा गड्ढा हो गया, ये गड्ढा आम गड्ढा नहीं, बल्कि जोशीमठ के दरकने से ही जुड़ा है। जोशीमठ के पास बद्रीनाथ नेशनल हाईवे पर करीब 10 और बड़ी दरारें आने की खबर है।

26 फरवरी को भी बद्रीनाथ नेशनल हाईवे पर भुस वडियार के पास अचानक पानी बहने लगा। बाद में कहा गया कि ऐसा खेती के लिए बनी पाइपलाइन फटने से हुआ। SDM जोशीमठ कुमकुम जोशी मौके पर पहुंचीं और बताया कि पानी रिसने से सड़क को नुकसान हुआ है, भारी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है।

26 फरवरी को जोशीमठ के मेन मार्केट के पास अचानक पहाड़ से पानी बहकर आने लगा। लोग डर गए कि इससे चट्टानें न खिसकने लगें। हालांकि, दोपहर तक रिसाव बंद हो गया।
26 फरवरी को जोशीमठ के मेन मार्केट के पास अचानक पहाड़ से पानी बहकर आने लगा। लोग डर गए कि इससे चट्टानें न खिसकने लगें। हालांकि, दोपहर तक रिसाव बंद हो गया।

जोशीमठ खिसक रहा, बद्रीनाथ कैसे पहुंचेंगे श्रद्धालु
चारधाम यात्रा बद्रीनाथ, केदारनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री से गुजरती है। जोशीमठ के सुनील, स्वी, मनोहरबाग, टिनाग, सिंहधार, मारवाडी, चुनार, गांधीनगर, रविग्राम, कोठिला में मकानों और खेतों में नई दरारें आ रही हैं। जोशीमठ रेलवे रिजर्वेशन केंद्र के सामने बद्रीनाथ हाईवे पर दो दिन पहले हुए एक बड़े गड्ढे को बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) की टीम में पत्थर डालकर भरने का काम शुरू किया है।

रोपवे तिराहे के पास भी एक बड़ा गड्ढा हो गया है। जोशीमठ और मारवाड़ी के बीच 10 किमी के दायरे में नई दरारें आने की बात जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संजय उनियाल ने भी मानी है। संघर्ष समिति से जुड़े अतुल सती ने कहा- ‘अभी तो थोड़ी ही बारिश में ये गड्ढे बन रहे हैं, दरारें आ रही हैं। दो महीने बाद जब यहां से हजारों वाहन और लाखों लोग गुजरेंगे तब क्या होगा।’

उधर, तहसीलदार रवि शाह ने हालात काबू में बताए हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि चारधाम यात्रा के लिए जोशीमठ का ये रूट और बद्रीनाथ हाईवे तैयार है?

जोशीमठ में घरों के दरकने का सिलसिला 50 दिन पहले शुरू हुआ था। शुरुआत में तो जोर-शोर से चर्चा हुई, दिन-रात टीवी पर कवरेज हुई, लेकिन अब जोशीमठ पर किसी का ध्यान नहीं। करीब 50 दिन से जोशीमठ आपदा के पीड़ित तहसील परिसर में धरना दे रहे हैं। कई बार मशाल जुलूस और रैलियां भी निकालीं।

लोगों का आरोप है कि सरकार सिर्फ टालमटोल कर रही है। आंदोलन के नेता अतुल सती ने बताया कि आपदा प्रभावितों के लिए पुनर्वास, विस्थापन और मुआवजा राशि क्या है, इसकी घोषणा सरकार को जल्द करना चाहिए। लोगों के रहने का इंतजाम करना भी सरकार की जिम्मेदारी है।

900 परिवारों ने घर छोड़ा, होटलों-रिश्तेदारों के घर में रह रहे
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जोशीमठ शहर में अब तक कुल 868 घरों में दरारें आई हैं, वहीं 181 घर अनसेफ जोन में हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके गांधीनगर, सिंहधार, मनोहरबाग और रवि ग्राम हैं। करीब 900 घरों से विस्थापित हुए लोगों को सरकारी बिल्डिंगों और होटलों में ठहराया गया है।

जोशीमठ के करीब 40 प्राइवेट होटलों में विस्थापित परिवारों को रखा गया था, जो अब तक इन्हीं होटलों में रह रहे हैं। करीब 149 परिवार या तो अपने रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं या फिर किराए के मकान में रहने लगे हैं। सरकार का दावा है कि अब तक पीड़ितों को उनके नुकसान के आधार पर 5 हजार से 1 लाख रुपए प्रति परिवार की मदद दी गई है। इस पर 6 करोड़ 34 लाख रुपए खर्च किए गए हैं।