Tuesday, August 18, 2026

रेत परिवहन में ट्रैक्टर पलटा,चालक की मौत, सीतामढ़ी में गुस्सा

कोरबा. कभी दफन मुर्दों को कब्र से बाहर निकालते तो कभी जिंदा लोगों को रेत की कब्र में दफन करते रेत के चोरों/तस्करों और कथित रेत माफियाओं के हौसले पस्त नहीं हो रहे। मामूली कार्यवाही के बाद इन्हें मिलता अभयदान नदी के सोना को चोरी करने का मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ सरकार को बड़े राजस्व के नुकसान की ओर धकेल रहा है। कहने को तो चंद जनप्रतिनिधि आम जनता के साथ विरोध की बात करते हैं लेकिन चंद मिनटों के बाद विरोध का यह स्वर टांय-टांय फिस्स हो जाता है। इसके पीछे रेत चोरों के साथ संबंधितों का रिश्ता आखिर क्या कहलाता है? पुलिस ने तो अवैध रेत के मामलों की धरपकड़ से हाथ खींच लिया है और अपना काम नहीं बताया है। दूसरी तरफ माइनिंग के पास अमले की कमी है। बकौल माइनिंग इंस्पेक्टर विभाग कार्यवाही तो करता है लेकिन कहां-कहां और कितना कार्यवाही करें!अमला हमारे पास कम है। अब यह अमले का रोना और पुलिस का हाथ खींच लेना, राजस्व अधिकारियों के द्वारा की जाने वाली अनदेखी आखिर किसलिए? जबकि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्पष्ट तौर पर रेत, मुरुम सहित अन्य खनिज की चोरी रोकने के लिए जिम्मेदारियां तय की है। निर्देश के बाद खनिज,राजस्व, पुलिस अमला मुस्तैद हुआ लेकिन बाद में सब बिखर गए।