Wednesday, August 5, 2026

विवाह के लिए नहीं कर सकेंगे मतांतरण, जबरन मतांतरण कराने वाले को दस साल तक कैद

चंडीगढ़, हरियाणा में कोई भी व्यक्ति अब सिर्फ शादी करने के लिए मतांतरण नहीं कर सकेगा। जबरन मतांतरण के मामले में आरोपित को न केवल दस साल तक कैद व लाखों रुपये का जुर्माना भुगतना होगा, बल्कि उसे पीड़ित को भी गुजारा भत्ता व अन्य खर्च देना पड़ेगा। अगर आरोपित का स्वर्गवास हो जाता है तो उसकी अचल संपत्ति से पीड़ित को आर्थिक मदद दिलाई जाएगी। मतांतरण के बाद विवाह से जन्मे नाबालिगों को भी भरण-पोषण के लिए आर्थिक मदद देनी होगी।

राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय की मुहर लगते ही हरियाणा विधिविरुद्ध धर्म परिवर्तन निवारण कानून लागू हो गया है। जबरन मतांतरण को रोकने के लिए मार्च में विधानसभा के बजट सत्र में विधेयक पारित कराने वाली सरकार ने विगत एक दिसंबर को हुई कैबिनेट बैठक में हरियाणा विधिविरुद्ध धर्म परिवर्तन निवारण अधिनियम के नियम तय कर दिए थे। नया कानून लागू होने के बाद कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से मतांतरण कर सकता है, लेकिन पहले जिला मजिस्ट्रेट (उपायुक्त) से अनुमति लेनी पड़ेगी। हालांकि विवाह के लिए मतांतरण नहीं कराया जा सकेगा। जांच के बाद उपायुक्त मतांतरण की अनुमति नहीं देते हैं तो उनके आदेश के विरुद्ध 30 दिन के भीतर मंडलायुक्त के समक्ष अपील की जा सकेगी।

कानून के अनुसार किसी प्रलोभन, बल प्रयोग, षड्यंत्र से मतांतरण कराया जाता है तो पांच वर्ष तक का कारावास और न्यूनतम एक लाख रुपये जुर्माना होगा। विवाह के लिए धर्म छिपाने पर तीन से 10 साल तक कैद और न्यूनतम तीन लाख रुपये जुर्माना, सामूहिक मतांतरण में नियमों का उल्लंघन करने पर पांच से 10 साल तक कैद और न्यूनतम चार लाख रुपये जुर्माना और एक बार से अधिक जबरन मतांतरण में पकड़े जाने पर दस साल की सजा व पांच लाख से कम जुर्माना नहीं होगा।