
ओडिशा के अरकू की खूबसूरत वादियों का आनंद लेने के लिए किरंदुल-विशाखापट्टनम ट्रेन में विस्टाडोम कोच जोड़ा गया है। विशाखापट्टनम से निकलने वाली दिन की ट्रेन में यह विस्टाडोम कोच जुड़कर केवल ओडिशा के अरकू तक ही आएगा। जिसके बाद यहां स्टेशन में यह कोच ट्रेन से अलग हो जाएगा। यानी आगे किरंदुल तक यह कोच ट्रेन से जुड़कर नहीं जाएगा।
ठीक इसी प्रकार जब किरंदुल से ट्रेन वापस विशाखापट्टनम के लिए निकलेगी तो फिर से अरकू में यह कोच ट्रेन से जुड़ जाएगा, जो विशाखापट्टनम तक जाएगा। यह निर्णय ईको रेलवे ने लिया है। इसकी जानकारी रेलवे के सीनियर डिविजनल कॉमर्शियल एके त्रिपाठी ने दी है।
इधर, बस्तर के लोगों में अब रेलवे के प्रति नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि जब वही ट्रेन बस्तर तक आएगी तो इसमें से रेलवे विस्टाडोम कोच को अलग क्यों कर रहा है। बस्तर के लोगों के साथ यह भेदभाव क्यों? लोगों का कहना है कि कुछ महीने पहले रेलवे के DRM अनूप सतपथी बस्तर आए थे।
जिन्होंने महज 1 महीने के अंदर किरंदुल-विशाखापट्टनम ट्रेन में विस्टाडोम कोच जोड़ने की बात कही थी। जिससे लोग बस्तर की खूबसूरत वादियों का आनंद ले सकें। लेकिन, अब सिर्फ अरकू तक ही इस कोच को लाया जा रहा है। लोगों ने इसे किरंदुल तक लाने की मांग की है। ताकि बस्तरवासियों को भी इसका फायदा मिल सके।
किरंदुल से विशाखापट्टनम के लिए चलती है 2 पैसेंजर ट्रेन
बस्तर के दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल से विशाखापट्टनम के लिए दो पैसेंजर ट्रेनें चलती हैं। जिनमें से 1 दिन की ट्रेन है तो वहीं दूसरी नाइट एक्सप्रेस है। कोरोना महामारी की वजह से नाइट एक्सप्रेस का परिचालन प्रतिदिन नहीं किया जा रहा था। सप्ताह में केवल 2 दिन जिनमें मंगलवार और शनिवार को ही ट्रेन चल रही थी। लेकिन, लोगों की मांग और पॉलिटिकल दबाव के बीच ट्रेन का परिचालन सप्ताह में प्रतिदिन फिर से शुरू किया जा रहा है।
जानिए क्या होता है विस्टाडोम कोच?
विस्टाडोम कोच ऐसे डिब्बे होते हैं जिनमें कांच की चौड़ी खिड़कियां और छतें भी कांच की होती हैं। पारदर्शी छत इसका खास आकर्षण होता है। जिससे यात्री पूरे रास्ते प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद ले सकते हैं। विस्टाडोम कोच को लोग भी खूब पसंद करते हैं। लेकिन, इस कोच में यात्री केवल दिन में ही आनंद ले सकते हैं।











