कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला अस्पताल में 8 माह की गर्भवती महिला और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि महिला को तीन दिन तक सामान्य प्रसव का इंतजार कराया गया और सिजेरियन व सोनोग्राफी कराने की मांग के बावजूद समय पर आवश्यक निर्णय नहीं लिया गया। परिजनों ने महिला को हायर सेंटर रेफर नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया है।
मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीम गठित की गई है। मेडिकल कॉलेज के डॉ. आदित्य सिसोदिया को जांच अधिकारी बनाया गया है।
लेबर पेन के बाद CHC लेकर पहुंचे थे परिजन
जानकारी के मुताबिक, दीपका बस्ती निवासी ओंकारेश्वर रजक ने नवंबर 2025 में कविता से लव मैरिज की थी। 24 सितंबर को कविता को लेबर पेन होने के बाद परिजन उसे मिनीमाता शांतिनगर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) लेकर पहुंचे थे।
परिजनों का आरोप है कि उस समय स्वास्थ्य केंद्र में केवल महिला स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थी। इसके बाद 25 सितंबर को कविता को एनीमिया की स्थिति को देखते हुए मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल रेफर किया गया।
परिजनों का आरोप- तीन दिन तक सामान्य प्रसव का इंतजार कराया
परिजनों का आरोप है कि जिला अस्पताल में कविता को करीब तीन दिनों तक सामान्य प्रसव का इंतजार कराया गया। उन्होंने डॉक्टरों से सोनोग्राफी कराने और सिजेरियन के जरिए प्रसव कराने की मांग की, लेकिन उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं हुई।
परिजनों का यह भी आरोप है कि महिला की स्थिति को देखते हुए उसे समय रहते किसी हायर सेंटर रेफर नहीं किया गया।
लेबर रूम में बिगड़ी तबीयत, कुछ देर बाद मौत
परिजनों के मुताबिक, सोमवार तड़के कविता की प्रसव पीड़ा बढ़ गई। इसके बाद उसे लेबर रूम में शिफ्ट किया गया। वहां उसकी सांसें तेज हो गईं और कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई।
परिजनों ने सीएचसी और मेडिकल कॉलेज में रात के समय डॉक्टरों के उपलब्ध नहीं होने का भी आरोप लगाया है। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है।
डॉक्टर ने आरोपों को बताया गलत
वहीं, जांच अधिकारी बनाए गए डॉ. आदित्य सिसोदिया ने परिजनों के आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि मरीज को तीनों दिन उचित इलाज और देखभाल दी गई थी तथा डॉक्टरों ने नियमित रूप से राउंड भी लिया।
डॉ. सिसोदिया के मुताबिक, महिला को जब लेबर रूम में शिफ्ट किया गया, उस समय गर्भ में बच्चे की धड़कन नहीं थी। ऐसे में सिजेरियन करने का कोई औचित्य नहीं था।
उन्होंने बताया कि महिला की स्थिति अचानक बिगड़ी और घबराहट व पल्पिटेशन के बाद उसकी मौत हुई। मामले की जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जांच रिपोर्ट के बाद होगी स्थिति स्पष्ट
फिलहाल मामले में परिजनों के आरोप और अस्पताल प्रबंधन के पक्ष में अंतर है। जांच अधिकारी द्वारा मामले से जुड़े मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार की प्रक्रिया और घटनाक्रम की जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इलाज में किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी या नहीं।











