कोरबा (छत्तीसगढ़)।छत्तीसगढ़ की औद्योगिक राजधानी कोरबा एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला BALCO के BCPP (Balco Captive Power Plant) संयंत्र से जुड़ा है, जिसे लेकर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं। आरोप इतने गंभीर हैं कि यदि निष्पक्ष जांच होती है, तो यह देश के बड़े औद्योगिक घोटालों में शामिल हो सकता है।
ऐतिहासिक संयंत्र पर सवाल
कभी ऊर्जा आत्मनिर्भरता की मिसाल रहा BCPP संयंत्र, BALCO के एल्यूमिनियम उत्पादन की रीढ़ माना जाता था। लेकिन अब आरोप है कि इस विशाल संयंत्र को बिना पारदर्शी प्रक्रिया और आवश्यक अनुमतियों के ध्वस्त कर दिया गया।
नेहरू युग की औद्योगिक विरासत
कोरबा में औद्योगिक विकास की नींव देश के प्रथम प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru के समय रखी गई थी। सोवियत सहयोग से स्थापित इस परियोजना का उद्देश्य भारत को एल्यूमिनियम उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना था।
विस्तार से ध्वस्तीकरण तक
1988: BCPP-1 के तहत 270 मेगावाट उत्पादन क्षमता
2005-06: BCPP-2 के तहत 540 मेगावाट का विस्तार
बाद में 1200 मेगावाट क्षमता का नया संयंत्र
इतनी बड़ी परियोजना के अचानक ध्वस्तीकरण ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—निर्णय किसने लिया और किन आधारों पर?
अनुमतियों पर संदेह
सूत्रों के अनुसार, संयंत्र तोड़ने के दौरान आवश्यक प्रशासनिक और वैधानिक अनुमतियों का पालन नहीं किया गया। स्थानीय प्रशासन से लेकर राज्य और केंद्र स्तर तक किसी स्पष्ट अनुमति का रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
स्क्रैप में हजारों करोड़ का खेल?
सबसे बड़ा आरोप आर्थिक अनियमितताओं को लेकर है। दावा किया जा रहा है कि:
हर महीने लगभग 500 करोड़ रुपये का स्क्रैप बेचा गया
कुल लेनदेन 5000 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है
इसके अलावा, महंगी मशीनरी को भी अन्य स्थानों पर भेजे जाने की बात कही जा रही है।
पैसा कहाँ गया?
मुख्य सवाल यह है कि इस कथित स्क्रैप बिक्री से प्राप्त राशि कहाँ गई।
क्या यह सरकारी खातों में जमा हुई?
या निजी स्तर पर इसका दुरुपयोग हुआ?
इस पर अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टता नहीं है।
प्रबंधन पर आरोप
सूत्रों के मुताबिक, यह घटनाक्रम Vedanta Limited के अधीन BALCO के तत्कालीन प्रबंधन के दौरान हुआ। उस समय के नेतृत्व की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
दबाव और चुप्पी के आरोप
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप हैं कि मामले को दबाने के लिए प्रभाव और दबाव का इस्तेमाल किया गया। कुछ लोगों का दावा है कि जांच की कोशिश करने वालों को रोका गया।
कॉर्पोरेट छवि बनाम आरोप
एक ओर वेदांता समूह सामाजिक कार्यों और CSR गतिविधियों के लिए जाना जाता है, वहीं दूसरी ओर इस तरह के आरोप उसकी साख पर सवाल खड़े करते हैं।
जांच की मांग तेज
विशेषज्ञों का मानना है कि:
मामले की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच होनी चाहिए
सभी वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों का ऑडिट किया जाए
जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर कार्रवाई हो
BCPP संयंत्र का यह मामला अब सिर्फ एक औद्योगिक इकाई के ध्वस्तीकरण तक सीमित नहीं रहा। यह पारदर्शिता, जवाबदेही और सार्वजनिक संसाधनों के प्रबंधन का बड़ा प्रश्न बन चुका है।
बताया जा रहा है कि इस पूरे प्रकरण से जुड़े दस्तावेज, सौदों की जानकारी और जिम्मेदार व्यक्तियों के नामों का खुलासा जल्द किया जा सकता है।









