
भारत में दहशतगर्दी के लिए गजवा-ए-हिन्द का मॉडल तैयार किया गया था। इसकी कमांड पाकिस्तान के हाथ में थी। यह खुलासा शुक्रवार को फुलवारी शरीफ से मरगूव अहमद दानिश नामक एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद हुआ। पुलिस ने PM नरेंद्र मोदी के पटना आगमन से एक दिन पहले 11 जुलाई को इस आतंकी नेटवर्क का खुलासा किया था। PM भी इनके निशाने पर थे। अब तक गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस और गिरफ्तारियां कर रही है। इसी सिलसिले में कल दानिश को पकड़ा गया था।
पटना पुलिस को दानिश के स्मार्टफोन से कई बेहद संवेदनशील जानकारियां मिली हैं। पुलिस के मुताबिक, दानिश ही गजवा-ए-हिन्द मॉडल को ऑपरेट कर रहा था। हैरानी की बात तो यह है कि यह मॉडल बिहार में 2016 से काम कर रहा था, लेकिन भारतीय खुफिया एजेंसियों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
पुलिस के मुताबिक इस काम को अंजाम देने के लिए एक वॉट्सऐप ग्रुप बनाया गया था। ग्रुप के दो एडमिन थे। इनमें से एक पाकिस्तान का फैजान और दूसरा पटना का दानिश था।
पटना पुलिस ने शुक्रवार को फुलवारी शरीफ से मरगूव अहमद दानिश को गिरफ्तार किया था। उसके स्मार्ट फोन से पाकिस्तानी कनेक्शन खुलासा हुआ है। पुलिस ने 2016 से लेकर अब तक के वॉट्सऐप चैट के बारे में जानकारी दी है जिसमें पाकिस्तान से भारत की तबाही का मैसेज दिया जा रहा था। इसके लिए पाकिस्तान से बड़ी फंडिंग भी हो रही थी।
इन चैट्स से साफ हो रहा है कि पाकिस्तान के फैजान और बिहार के दानिश मिलकर भारत के खिलाफ बड़ी साजिश पर काम कर रहे थे। अब तक पुलिस वॉट्सऐप ग्रुप का ही खुलासा कर पाई है, पूछताछ में अभी बड़े नेटवर्क का खुलासा बाकी है।
बिहार की राजधानी से चल रहे दहशतगर्दी के इस खेल का खुलासा होने के बाद अब पटना पुलिस प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच की मांग कर रही है। वहीं पाक का कनेक्शन सामने आते ही खुफिया एजेंसियां भी अलर्ट हो गई हैं।
पटना पुलिस ने जो खुलासा किया है, उसके मुताबिक 2023 में जिहाद का पूरी योजना थी। इस बड़े प्लान पर 2016 से काम चल रहा था और खुफिया तंत्र को इसकी जानकारी नहीं हो पाई है। पटना पुलिस के पास भी दानिश को लेकर कोई बड़ा इनपुट नहीं था। पुलिस ने PFI कनेक्शन को लेकर पूछताछ के लिए दानिश को हिरासत में लिया था, लेकिन पुलिस के हाथ लगे दानिश के स्मार्ट फोन ने ऐसा राज खोला कि पुलिस की नींद उड़ गई।
ऐसी आशंका है कि 2016 से 2022 तक पाकिस्तान ने बिहार में बड़ा नेटवर्क तैयार कर लिया होगा। पटना में दहशतगर्दी के नए मॉडल पर काम चल रहा था, लेकिन स्थानीय पुलिस से लेकर खुफिया तंत्र काे भी इसकी एक भी कड़ी का पता नहीं चल सका।







