कोरबा/पसान। प्रदेश सरकार जहां गांव-गांव में “सुशासन तिहार” के जरिए पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का दावा कर रही है, वहीं कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा अनुभाग अंतर्गत तहसील पसान से सामने आए एक कथित रिश्वतखोरी वीडियो ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे वीडियो में हल्का नंबर 10 के पटवारी विनोद अग्रवाल कथित तौर पर ग्रामीणों से पैसे लेते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद क्षेत्र में लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आने लगा है। ग्रामीणों और किसानों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
वन पट्टा और नामांतरण के नाम पर वसूली का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि वन पट्टा ऑनलाइन कराने के नाम पर उनसे 5 हजार रुपये तक वसूले जाते हैं। वहीं फौती नामांतरण और अन्य राजस्व संबंधी कार्यों के लिए 10 हजार रुपये तक की मांग की जाती रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि इस कथित वसूली का सबसे ज्यादा असर गरीब आदिवासी किसानों पर पड़ रहा है, जिन्हें अपने वैध सरकारी काम करवाने के लिए भी पैसे देने पड़ रहे हैं।
“पैसा दो तभी काम होगा” का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में लंबे समय से “पैसा दो तभी काम होगा” जैसी व्यवस्था चल रही है। बिना पैसे दिए राजस्व विभाग की फाइलें आगे नहीं बढ़तीं और लोगों को महीनों तक कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं।कई किसानों ने दावा किया कि मजबूरी में उन्हें कर्ज लेकर पैसे देने पड़े ताकि जमीन से जुड़े जरूरी काम पूरे हो सकें।
वायरल वीडियो के बाद बढ़ा दबाव
वीडियो वायरल होने के बाद मामला अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक कर्मचारी का मामला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है।लोगों का कहना है कि यदि पहले शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई की जाती, तो हालात यहां तक नहीं पहुंचते।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि वायरल वीडियो की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।ग्रामीणों ने कहा कि गरीब किसानों और आदिवासियों के साथ अन्याय किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
अब सभी की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है। लोगों का कहना है कि यदि सुशासन के दावों को जमीन पर साबित करना है, तो भ्रष्टाचार के मामलों में कठोर कदम उठाने होंगे।फिलहाल पूरे इलाके में यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है और ग्रामीण प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।









