Tuesday, October 6, 2026

महिला आरक्षक का वीडियो वायरल, पुलिस लाइन में टॉयलेट साफ कराने का आरोप; RI से भी जवाब तलब

जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में महिला पुलिस आरक्षक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। वायरल वीडियो में महिला आरक्षक पुलिस लाइन कार्यालय के बाथरूम और परिसर की सफाई करती हुई नजर आ रही हैं। महिला आरक्षक ने वीडियो के जरिए पुलिस लाइन में पदस्थ RI प्रदीप जोशी पर प्रताड़ित करने और ज्वाइनिंग नहीं देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

मामला सामने आने के बाद एडिशनल एसपी ने महिला आरक्षक और RI दोनों से जवाब तलब किया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फेसबुक पर महिला आरक्षक ने अपलोड किया वीडियो

महिला आरक्षक ने अपने फेसबुक अकाउंट पर वीडियो अपलोड किया है। वीडियो में वह पुलिस की वर्दी में पुलिस लाइन कार्यालय परिसर में सफाई करती दिखाई दे रही हैं।

वीडियो में महिला आरक्षक को RI प्रदीप जोशी के कार्यालय और बाथरूम की सफाई करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो के जरिए महिला आरक्षक ने अपनी परेशानी बताते हुए RI पर कई आरोप लगाए हैं।

ज्वाइनिंग नहीं देने का लगाया आरोप

महिला आरक्षक का आरोप है कि वह पिछले दो दिनों से आमद देने के लिए RI से मुलाकात करने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन उन्हें ज्वाइनिंग नहीं दी जा रही है।

महिला का कहना है कि उनसे काम कराया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें ड्यूटी ज्वाइन नहीं करने दी जा रही। इसी दौरान बाथरूम और कार्यालय की सफाई कराए जाने का आरोप भी उन्होंने लगाया है।

वीडियो वायरल होने के बाद विभाग में मचा हड़कंप

महिला आरक्षक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा। इसके बाद अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित दोनों पक्षों से जवाब मांगा है।

ASP ने कहा- जांच के बाद होगी कार्रवाई

मामले को लेकर एडिशनल एसपी ने महिला आरक्षक और RI से जवाब तलब किया है। अधिकारियों के अनुसार, पूरे प्रकरण की जांच की जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई होगी।

ASP ने स्पष्ट किया है कि जांच के बाद यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल महिला आरक्षक द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले में विभागीय जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सफाई कराने और ज्वाइनिंग नहीं देने के आरोपों की वास्तविक स्थिति क्या है।