कोरबा। पावर हाउस रोड स्थित न्यू जेके ज्वैलर्स के संचालक जय सोनी एक बार फिर गंभीर आरोपों के चलते चर्चा में हैं। इस बार उन पर एक रिटायर्ड फौजी से टोल प्लाजा में साझेदारी के नाम पर लगभग ₹34 लाख 40 हजार लेने और बाद में कथित रूप से साझेदारी से अलग कर देने का आरोप लगा है। शिकायत के आधार पर झारखंड के नगड़ी थाना पुलिस ने जय सोनी सहित अन्य आरोपियों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता रिटायर्ड फौजी प्रेमचंद पांडे के अनुसार, जय सोनी और उनके साले जतिन राम वानी ने उनसे संपर्क कर बताया कि झारखंड के नगड़ी थाना क्षेत्र के पास स्थित पटरा चोली टोल प्लाजा का संचालन उनके पास है, लेकिन आर्थिक अभाव के कारण कार्य सुचारु रूप से प्रारंभ नहीं हो पा रहा है। अधिक मुनाफे का भरोसा दिलाकर उन्हें निवेश के लिए तैयार किया गया।
शिकायत में कहा गया है कि 26 अगस्त 2025 से अलग-अलग चरणों में नकद एवं बैंक खातों के माध्यम से कुल लगभग ₹34.40 लाख जय सोनी को दिए गए। इसके बाद ₹100 के स्टांप पेपर पर एक अनुबंध भी किया गया, जिसके आधार पर प्रेमचंद पांडे ने अपने कर्मचारियों के माध्यम से टोल प्लाजा पर वसूली का कार्य प्रारंभ कराया।
शिकायत के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच यह सहमति बनी थी कि फास्टैग से प्राप्त राशि जय सोनी के खाते में जाएगी, जबकि नकद वसूली प्रेमचंद पांडे के पास रहेगी। आरोप है कि जब टोल प्लाजा से अच्छा मुनाफा होने लगा, तब जय सोनी अपने साले जतिन, टोल मैनेजर लवकुश यादव तथा अन्य लोगों के साथ टोल प्लाजा पहुंचे और शिकायतकर्ता के कर्मचारियों को कथित रूप से धमकाकर वहां से भगा दिया तथा टोल पर कब्जा कर लिया।
प्रेमचंद पांडे का कहना है कि उनके कर्मचारियों को भविष्य में टोल प्लाजा के आसपास दिखाई देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई। इसके बाद उन्होंने झारखंड के नगड़ी थाना में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इस मामले में जय सोनी तथा शिकायतकर्ता प्रेमचंद पांडे से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक किसी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी।
इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि गंभीर आरोपों से जुड़े मामलों में निष्पक्ष एवं शीघ्र जांच होनी चाहिए, ताकि सत्य सामने आ सके और दोषी पाए जाने पर कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित हो। राजनीतिक दलों एवं जनप्रतिनिधियों से भी अपेक्षा की जा रही है कि वे कानून के निष्पक्ष पालन का समर्थन करें और ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच सुनिश्चित कराने में सहयोग करें।











