एसईसीएल कुसमुंडा विस्तार परियोजना से प्रभावित महिला भू-विस्थापितों को प्रबंधन नौकरी देगा। इसमें विवाहित महिला भू-विस्थापित भी शामिल हैं। बीते कई वर्षों से एसईसीएल में नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे इन प्रभावितों के लिए यह बड़ी राहत की बात है। एसईसीएल प्रबंधन ने कुसमुंडा खदान से प्रभावित महिला भू-विस्थापितों को नौकरी देने के संबंध में स्वीकृति आदेश जारी कर दिया है। इसमें मध्य प्रदेश पुनर्वास व आरएनआर पॉलिसी के तहत सहमति दी गई है।
विवाहित महिला भू-विस्थापितों को नौकरी के मामले में प्रबंधन ने इस को स्वीकृति के लिए उच्च स्तर पर भेजा था। जहां से अनुमति मिलने के बाद एसईसीएल ने नौकरी देने की प्रक्रिया शुरू की है। कंपनी में इसे इस तरह का पहला मामला बताया जा रहा है। एसईसीएल प्रबंधन के एक अधिकारी ने बताया कि कंपनी ने नौकरी के लिए स्वीकृति दे दी है।
मेडिकल व अन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बाद नियुक्ति दी जाएगी। प्रबंधन ने जिनकी नियुक्ति के लिए सहमति जताई है। उसमें एसईसीएल कुसमुंडा विस्तार परियोजना से प्रभावित बरकुटा गांव की महिला भू-विस्थापित निरूपा बाई, अनिता कंवर, नीलिमा, इंदू बाई और विभूति भावना शामिल है। इसमें तीन महिला भू-विस्थापित विवाहित हैं।कुसमुंडा खदान के बरकुटा गांव में महिला भू-विस्थापितों ने भी नौकरी के लिए आवेदन दिया था। लेकिन पहले उनकाें प्रबंधन अक्सर नियमाें का हवाला देता था। लेकिन इसके बाद भी महिला भू-विस्थापिताें के साथ ही अन्य प्रभाविताें ने नाैकरी की मांग काे लेकर बार-बार आवाज उठाते रहे। महिला भू-विस्थापिताें के नाैकरी का रास्ता साफ हाेने के साथ ही कुछ अन्य लंबित आवेदनों पर भी नाैकरी की अास जगी है। करीब 25 वर्ष पहले बरकुटा की जमीन का अधिग्रहण हुआ था।नाैकरी के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रही निरुपा बाई काे एसईसीएल कुसमुंडा प्रबंधन के अधिकारियाें ने किसान सभा के नेताओं की उपस्थिति में एसईसीएल में नौकरी लिए सहमति का पत्र दिया। इस दाैरान प्रशांत झा, जवाहर सिंह कंवर, दीपक साहू उपस्थित रहे। कुछ दिन पहले ओबी प्राेडक्शन बाधित कर दिया था। जिसके बाद प्रबंधन के अधिकारियाें ने आश्वासन देकर मामला शांत कराया था।











