Korba में बिजली संयंत्रों से निकलने वाली फ्लाई ऐश (राख) के निपटान और राखड़ डैम निर्माण में कथित अनियमितताओं की जांच तेज हो गई है। National Institute of Technology Rourkela के विशेषज्ञों की उच्च स्तरीय टीम ने सीएसईबी के झाबु राखड़ बांध का तकनीकी निरीक्षण शुरू कर दिया है। अचानक शुरू हुई इस जांच से विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है।
जांच के घेरे में झाबु राखड़ बांध
एनआईटी की टीम झाबु राखड़ बांध की क्षमता, सुरक्षा और निर्माण गुणवत्ता की बारीकी से जांच कर रही है। टीम विशेष रूप से इस बात का आकलन कर रही है कि बांध में तय सीमा से अधिक राख तो नहीं भरी गई है और क्या इससे भविष्य में किसी बड़े हादसे का खतरा बढ़ सकता है।
जांच में बांध की ऊंचाई, दबाव क्षमता और सुरक्षा मानकों को भी परखा जा रहा है। विशेषज्ञ यह भी देख रहे हैं कि बांध का निर्माण और विस्तार मूल ड्राइंग एवं डिजाइन के अनुरूप हुआ या नहीं। आरोप हैं कि लागत कम करने और अधिक राख डंप करने के लिए तकनीकी मानकों से समझौता किया गया।
इसके अलावा तटबंधों के निर्माण में इस्तेमाल किए गए मटेरियल की गुणवत्ता की भी जांच की जा रही है। माना जा रहा है कि घटिया सामग्री के उपयोग के कारण ही कई बार राखड़ बांधों की दीवारों में दरार और राख रिसाव जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं।
करोड़ों के ‘राख खेल’ की खुल सकती है पोल
कोरबा में राखड़ बांधों की दीवार टूटने और राख के नदी-नालों तथा रिहायशी क्षेत्रों में फैलने की घटनाएं पहले भी विवादों में रही हैं। लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं कि फ्लाई ऐश यूटिलाइजेशन के नाम पर अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत से करोड़ों रुपए का खेल किया गया।
एनआईटी की तकनीकी जांच से अब इन आरोपों की सच्चाई सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है। यदि रिपोर्ट में अनियमितता और तकनीकी खामियां साबित होती हैं, तो कई जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की तलवार लटक सकती है।
दस्तावेज और सैंपल खंगाल रही टीम
जांच टीम ने मौके पर पहुंचकर सैंपल कलेक्शन और दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि निरीक्षण के दौरान कई तकनीकी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। जांच की खबर मिलते ही संयंत्र प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों में तनाव का माहौल है।








