कोरबा। छत्तीसगढ़ की ऊर्जाधानी कोरबा में फ्लाई ऐश (राख) परिवहन से जुड़ा मामला अब सिर्फ अनियमितताओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह जानलेवा लापरवाही का रूप लेता नजर आ रहा है। एक ओर राख परिवहन में “नोट उड़ने” के आरोप लग रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इसी सिस्टम की खामियों के बीच हादसे और मौत की घटनाएं सामने आ रही हैं।
डैम की हालत पर फिर उठे सवाल
सूत्रों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल (CSEB) के राखड़ डैम की स्थिति पहले से ही चिंताजनक रही है। पूर्व में डैम फूटने की घटनाओं ने प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए थे, लेकिन इसके बावजूद सुधार के ठोस कदम नजर नहीं आ रहे हैं। उल्टा, राख परिवहन से जुड़े कार्यों में कथित गठजोड़ और मनमानी जारी रहने के आरोप लग रहे हैं।
जेसीबी हादसे में मौत, सुरक्षा मानकों की खुली पोल
इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू हाल ही में सामने आया दर्दनाक हादसा है, जहां जेसीबी मशीन के नीचे दबकर एक व्यक्ति की मौत हो गई। इस घटना ने कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही को उजागर कर दिया है।
जमीन और कागज में बड़ा अंतर
बताया जा रहा है कि राख परिवहन के कार्यों में जमीन पर हो रहे काम और कागजी आंकड़ों में भारी अंतर है। आधा काम दिखाकर पूरा भुगतान लेने जैसे आरोप पहले भी लगते रहे हैं। अब डैम की खराब स्थिति और लगातार हो रहे हादसों ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है।
गठजोड़ के आरोप, पारदर्शिता पर सवाल
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को ही लगातार काम दिया जा रहा है, जबकि अन्य को नजरअंदाज किया जा रहा है। इससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं और कथित मिलीभगत के आरोप भी सामने आ रहे हैं।
जांच की मांग तेज, प्रशासन की भूमिका पर नजर
मामले को लेकर अब निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। जानकारों का मानना है कि यदि तकनीकी और वित्तीय दोनों पहलुओं की गहराई से जांच की जाए, तो बड़े स्तर पर गड़बड़ी सामने आ सकती है।
सवाल वही—कार्रवाई या चुप्पी?
राखड़ डैम फूटने जैसी घटनाएं और जेसीबी हादसे में हुई मौत यह संकेत दे रहे हैं कि मामला अब सिर्फ आर्थिक गड़बड़ी का नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा और जवाबदेही का है। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इन गंभीर आरोपों और घटनाओं पर ठोस कार्रवाई करता है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।









