कोरबा । जिले के विद्युत विभाग में अनियमितताओं और कमीशनखोरी के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। जनहित से जुड़े कार्यों में लापरवाही और जनता की गाढ़ी कमाई के दुरुपयोग को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। ताजा मामला वर्ष 2024 में प्रस्तावित 132/33 केवी सबस्टेशन खरमोरा से मोतीसागर पारा 33/11 केवी सबस्टेशन तक लाइन विस्तार कार्य से जुड़ा हुआ है।
इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र के दो 33/11 केवी सबस्टेशनों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराना था, ताकि किसी एक लाइन में फॉल्ट अथवा मेंटेनेंस के दौरान दूसरी लाइन से सप्लाई जारी रह सके और व्यापारियों व उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना न करना पड़े।
करीब 1 करोड़ 63 लाख 27 हजार 30 रुपये की लागत वाले इस कार्य को छह माह में पूरा किया जाना था, लेकिन आरोप है कि विभागीय मिलीभगत के चलते लाइन को निर्धारित मार्ग से हटाकर औद्योगिक क्षेत्र की ओर मोड़ दिया गया। जबकि टेंडर के अनुसार कार्य में इस प्रकार का बदलाव नियमों के विपरीत माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि रायपुर परियोजना विभाग द्वारा जारी टेंडर क्रमांक sTN(076)/Order No. 02-08/CW/2023-24/Tr. No. 2198/L-77/3132 दिनांक 28 अगस्त 2023 के तहत यह कार्य स्वीकृत हुआ था। कार्य में 13 मीटर एच-बीम पोल 166 नग, 11 मीटर पोल 100 नग, 11 मीटर पीसीसी पोल 10 नग सहित रेलवे क्रॉसिंग डबल सर्किट जैसे कार्य शामिल थे।
यह कार्य कटघोरा की कव्वाल इलेक्ट्रिकल कंपनी को दिया गया था। आरोप है कि निर्धारित प्ररूप में बदलाव कर लाइन को अन्य दिशा में ले जाया गया। साथ ही कार्य समयसीमा के भीतर पूरा नहीं हो सका और बाद में सामग्री गायब होने संबंधी पत्र विभाग को सौंपा गया।
सूत्रों के अनुसार कंपनी द्वारा उच्च स्तर पर प्रभाव का हवाला देकर कार्य कराने की चर्चा भी विभागीय गलियारों में रही। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि पुराने अधिकारियों के कार्यकाल में हुई अनियमितताओं का खामियाजा नए अधिकारियों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्होंने हाल ही में पदभार संभाला है।
यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो विभागीय कार्यप्रणाली, सामग्री प्रबंधन और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े कई अन्य मामलों का भी खुलासा हो सकता है। फिलहाल यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।







