Monday, August 3, 2026

तालिबान से इमरान की हमदर्दी पर अमेरिका खफा, इस धोखे के लिए पाक को सजा देने पर विचार हो रहा

अफगानिस्तान के ढहने और वहां से अमेरिका की शर्मनाक वापसी के बाद पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा चरम पर है। सामरिक समुदाय और अमेरिकी सांसद पाकिस्तान को सजा देने की मांग कर रहे हैं। उन्हें पूरा भरोसा है कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में भरोसा तोड़ा है।

2008 से 2011 तक अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत हुसैन हक्कानी दैनिक भास्कर को बताते हैं, ‘अमेरिकियों का मानना है कि पाकिस्तान द्वारा तालिबान को दिए गए समर्थन की वजह से ही अफगानिस्तान में अमेरिकी प्रतिष्ठा चकनाचूर हुई है। इसके मुख्य कारणों में से एक यह है कि पाकिस्तान में तालिबान को अभेद्य अभयारण्य मिल गया था।’

पाकिस्तान पर लग सकते हैं प्रतिबंध
यहां यह बताना जरूरी है कि जो बाइडेन ने राष्ट्रपति पद संभालने के छह महीने बाद भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से बात नहीं की है। एक वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक बताते हैं कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने हाल ही में सेवानिवृत्त जनरल और राजनयिकों की मीटिंग में यह चिंता जाहिर की है कि पाकिस्तान को अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।

अमेरिकी राजनयिक आगे बताते हैं कि हाल के इतिहास में ‘अमेरिका को हुए सबसे चौंकाने वाले नुकसान’ का ही नतीजा है कि बाइडेन ने इस्लामाबाद से मुंह फेर लिया है। वे कहते हैं कि अमेरिकी सैनिक लौट आए हैं। ऐसे में रणनीतिक विवेक यह कहता है कि बाइडेन प्रशासन को पाकिस्तान के जनरल और राजनयिकों की वादाखिलाफी के लिए जवाबदेही तय करनी चाहिए और पाकिस्तान पर कार्रवाई करने के लिए बाइडेन प्रशासन पर अभूतपूर्व दबाव है।

पाकिस्तान की आतंकियों से मिलीभगत से अमेरिका को नुकसान हुआ
बीते हफ्ते इस मुद्दे पर अमेरिकी सांसदों ने विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन को घेरा था। इस दौरान ब्लिंकन सांसदों की इस बात पर सहमत हुए कि अफगानिस्तान में पाकिस्तान की भूमिका संदिग्ध रही है और अमेरिका रिश्तों की समीक्षा करेगा। उन्होंने माना कि पाकिस्तान ने हक्कानी के आतंकियों सहित तालिबान को पनाह दी है। स्पष्ट रूप से पाकिस्तान की यह मिलीभगत अमेरिकी हितों के खिलाफ रही।

गौरतलब है कि पाकिस्तान उन देशों में से एक है जिसे अमेरिका ने एक प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी की दर्जा दिया था। पाकिस्तान अमेरिका द्वारा दंडित किए जाने के खतरे से अवगत है। यही कारण है कि पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद यूसुफ ने वॉशिंगटन से पाकिस्तान को ‘बलि का बकरा’ नहीं मानने के लिए कहा है।