नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बड़ा राजनीतिक दावा करते हुए कहा है कि उन्हें भाजपा में शामिल होने का ऑफर दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने कोई कमिटमेंट नहीं दिया, तो उनके यहां लगातार छापेमारी शुरू हो गई।
भूपेश बघेल ने यह बातें वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के पॉडकास्ट ‘दिल से विथ कपिल सिब्बल’ में कही हैं।
अमित शाह और पीएम मोदी से मुलाकात का जिक्र
पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें एक-दो बार मिलने के लिए बुलाया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बातचीत के लिए आमंत्रित किया था।
उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें समझ नहीं आया कि इन मुलाकातों का मकसद क्या है, लेकिन बाद में उन्हें लगा कि इन बैठकों के बाद कुछ ही दिनों में उनके यहां छापे पड़ जाते थे।
‘मदद की बात होती थी, मैं विपक्ष का धर्म निभाता रहा’
भूपेश बघेल के मुताबिक, मुलाकात के दौरान उनसे पूछा जाता था कि उनके खिलाफ कौन-कौन से मामले चल रहे हैं, कौन अधिकारी भरोसेमंद हैं और किस तरह मदद की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि उन्होंने साफ जवाब दिया कि वे विपक्ष में हैं और सरकार की आलोचना करना उनका राजनीतिक धर्म है, जिसे वे निभाते रहेंगे।
‘8-10 दिन में फिर पड़ जाता था छापा’
बघेल ने दावा किया कि मुलाकात के बाद वे लौट आते थे, लेकिन करीब 8-10 दिन के भीतर फिर छापा पड़ जाता था। उन्होंने बताया कि एक बार उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को फोन कर कहा कि मदद की बात हुई थी, लेकिन छापे पड़ रहे हैं। इस पर प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से बात करने की बात कही थी।
‘भाजपा में आने का इशारा था’
पूर्व मुख्यमंत्री का कहना है कि शुरू में सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा गया, लेकिन बाद में उन्हें लगा कि उन्हें भाजपा में शामिल होने का संकेत दिया जा रहा था।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी वे बिना किसी कमिटमेंट के लौटते थे, कुछ दिनों के भीतर उनके यहां कार्रवाई शुरू हो जाती थी।









