गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां 48 गांवों के सैकड़ों ग्रामीण अब भी अंधेरे में जीवन जीने को मजबूर हैं। बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित ग्रामीणों ने अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने के लिए खून से 500 से ज्यादा पत्र लिखकर प्रधानमंत्री Narendra Modi को भेजे हैं।
मामला मैनपुर ब्लॉक के राजापड़ाव क्षेत्र का है, जो उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में आता है। बुधवार को 8 पंचायतों के 48 गांवों के करीब 500 ग्रामीण अड़गड़ी गौठान में एकत्र हुए और “जय अंबेडकरवादी युवा संगठन” व “किसान संघर्ष समिति” के बैनर तले खून से पत्र लिखे। इन पत्रों को स्पीड पोस्ट के माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) को भेजा जाएगा।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार समाधान शिविरों और प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। मजबूरी में उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
ग्रामीणों का कहना है कि उनके क्षेत्र में बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पुल-पुलिया, शुद्ध पेयजल, सामुदायिक वन संसाधन और वन अधिकार पट्टा जैसी बुनियादी सुविधाएं अब तक नहीं पहुंच पाई हैं। बिजली नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई, इलाज और रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो रही है, वहीं छोटे व्यवसाय भी ठप पड़े हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, जब भी बिजली की मांग उठाई जाती है, तो अधिकारियों द्वारा उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व और NTCA से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) की बाध्यता बताकर मामला टाल दिया जाता है। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह क्षेत्र अभयारण्य के अंतर्गत आता है, इसलिए केंद्र सरकार और NTCA की अनुमति के बिना बिजली व्यवस्था स्थापित करना संभव नहीं है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे आगे और बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।







