Tuesday, May 12, 2026

कुसमुंडा SECL में ₹282 करोड़ के कथित घोटाले का खुलासा, PMO और CBI तक पहुंची शिकायत

कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की कुसमुंडा खदान एक बार फिर बड़े वित्तीय विवादों के घेरे में आ गई है। एक आरटीआई कार्यकर्ता एवं खोजी पत्रकार जितेंद्र कुमार साहू ने गंभीर आरोप लगाते हुए करीब ₹282 करोड़ के राजस्व नुकसान का दावा किया है। इस मामले में उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), CBI और अन्य केंद्रीय एजेंसियों को शिकायत भेजी है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि SECL के तत्कालीन शीर्ष प्रबंधन और कुछ निजी कॉर्पोरेट समूहों के बीच कथित सांठगांठ के चलते कोयले की ग्रेडिंग में हेराफेरी की गई। आरोप है कि उच्च गुणवत्ता वाले कोयले को कागजों में ‘G15-G17’ जैसी निम्न श्रेणी में दिखाकर निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

शिकायतकर्ता के अनुसार, इस प्रक्रिया के तहत अडाणी पावर, वेदांता और आरकेएम जैसे बड़े समूहों को फर्जी रिफंड और क्रेडिट नोट के माध्यम से लगभग ₹282 करोड़ का लाभ दिया गया, जिसे उन्होंने “राजस्व डकैती” करार दिया है।

आरोप यह भी है कि बिलासपुर मुख्यालय के तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों ने बिना स्वतंत्र ऑडिट के इतनी बड़ी राशि के क्रेडिट नोट जारी कर दिए, जिससे गंभीर वित्तीय अनियमितता सामने आई है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत की प्रतिलिपि CBI, ED, CAG और केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) को भी भेजी गई है। साथ ही डिजिटल फॉरेंसिक ऑडिट की मांग की गई है, जिसमें CIMFR/QCI की लैब रिपोर्ट और सैंपलिंग प्रक्रिया की भी जांच शामिल है।

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों की व्यक्तिगत संपत्ति जब्त कर नुकसान की भरपाई की जाए।

फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और यदि जांच होती है तो यह कोयला क्षेत्र में पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा परीक्षण माना जा रहा है।