Wednesday, April 22, 2026

कोरबा में राख परिवहन घोटाले का खुलासा: आधा लोड, पूरा भुगतान… करोड़ों की बंदरबांट का खेल!

कोरबा। छत्तीसगढ़ के पावर हब कोरबा से एक बार फिर बड़ा घोटाला सामने आया है। इस बार मामला राख (ऐश) परिवहन से जुड़ा है, जहां ट्रकों में आधी राख भरकर पूरा भुगतान लेने का खेल खुलेआम चल रहा है। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला नजर आ रहा है।

आधा माल, पूरा बिल… मिलीभगत का शक
स्थानीय सूत्रों और मौके पर कैद तस्वीरों के अनुसार, राखड़ डैम से निकलने वाले ट्रकों में क्षमता से काफी कम राख लोड की जा रही है, लेकिन कागजों में उन्हें फुल लोडेड दिखाया जा रहा है। यानी ट्रक आधा खाली, लेकिन भुगतान पूरा। इस पूरे खेल में ट्रांसपोर्टरों और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।

डंगनिया राखड़ डैम की तस्वीरों ने खोली पोल
डंगनिया राखड़ डैम से सामने आई तस्वीरें इस घोटाले की सच्चाई बयां कर रही हैं। तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि ट्रकों में राख की मात्रा बेहद कम है, फिर भी उन्हें पूरा भरा हुआ दिखाकर भुगतान लिया जा रहा है। सवाल उठता है कि लोडिंग साइट पर मौजूद अधिकारियों की नजर से यह गड़बड़ी कैसे बच रही है?

राख बना ‘ब्लैक गोल्ड’
कोरबा के पावर प्लांटों से निकलने वाली राख अब ट्रांसपोर्टरों के लिए ‘ब्लैक गोल्ड’ बन चुकी है। बिना पूरी मात्रा ढोए ही पूरा भुगतान मिलना इस कारोबार को बेहद फायदे का सौदा बना रहा है। यही वजह है कि कई कारोबारी अब कोयले के बजाय राख परिवहन में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं।

मॉनिटरिंग सिस्टम फेल, कागजों तक सीमित व्यवस्था
राख परिवहन की निगरानी के लिए जीपीएस ट्रैकिंग, वेट मापन और साइट सुपरविजन जैसी व्यवस्थाएं बनाई गई हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका कोई असर नजर नहीं आ रहा। इससे साफ है कि या तो मॉनिटरिंग में भारी लापरवाही है या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है।

सरकारी खजाने को भारी नुकसान
यदि हर ट्रक में आधा ही राख भरा जा रहा है और भुगतान पूरा हो रहा है, तो इससे सरकार को लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। यह सीधे तौर पर सार्वजनिक धन की लूट का मामला बनता जा रहा है।

जांच और कार्रवाई की उठी मांग
मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों ने उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज कर दी है। साथ ही दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की भी मांग उठ रही है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है या फिर ‘आधा राख, पूरा बिल’ का यह खेल यूं ही जारी रहेगा।