कोरबा वन मंडल अंतर्गत कुदमुरा रेंज के जिलगा परिसर में विचरण कर रहा 13 हाथियों का दल बीती रात मांड नदी पार कर वापस धरमजयगढ़ के जंगलों की ओर लौट गया। हाथियों के क्षेत्र से बाहर जाने के बाद वन विभाग और स्थानीय ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, हाथियों का यह दल दिन ढलने के बाद सक्रिय हुआ और कुदमुरा वन परिक्षेत्र के जंगलों में कुछ समय तक विचरण करने के बाद मांड नदी को पार कर धरमजयगढ़ की ओर बढ़ गया।
ग्रामीणों पर मंडरा रहा था खतरा
पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में हाथियों की सक्रियता के चलते ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ था। कई ग्रामीणों के खेत जंगल के बीच स्थित होने के कारण उन्हें खेती-किसानी के लिए घर से बाहर निकलते समय खतरे का सामना करना पड़ रहा था।
ऐसे में हाथियों के इलाके से बाहर जाने के बाद ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है और वे अब अपने दैनिक कार्यों में जुटने लगे हैं।
जटगा रेंज में अब भी 48 हाथियों का डेरा
हालांकि खतरा पूरी तरह टला नहीं है। कटघोरा वन मंडल के जटगा रेंज में अभी भी 48 हाथियों का बड़ा दल लगातार विचरण कर रहा है। यह दल अधिकांश समय पहाड़ी क्षेत्रों में रहता है, जिससे आमतौर पर ज्यादा दिक्कत नहीं होती।
लेकिन कई बार कुछ हाथी दल से अलग होकर नीचे गांवों की ओर आ जाते हैं, जिससे वन अमले और ग्रामीणों की परेशानी बढ़ जाती है।
वन विभाग की नजर बनी हुई है
वन विभाग लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। विभाग का कहना है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या हाथियों की मौजूदगी की जानकारी तुरंत दी जाए, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।







