रायपुर। छत्तीसगढ़ में अवैध और जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाने के उद्देश्य से राज्य सरकार का नया ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026’ पूरे प्रदेश में लागू हो गया है। छत्तीसगढ़ राजपत्र (गजट) में अधिसूचना प्रकाशित होने के साथ ही यह कानून 10 जुलाई 2026 से प्रभावी माना जाएगा। इसके लागू होने के बाद बल, प्रलोभन, लालच, दबाव या धोखाधड़ी के जरिए धर्म परिवर्तन कराने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह नया अधिनियम छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 1968 का स्थान लेगा। सरकार का कहना है कि नए कानून के माध्यम से अवैध धर्मांतरण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त दंड सुनिश्चित होगा।
सजा और जुर्माने के कड़े प्रावधान
नए कानून में अपराध की गंभीरता के अनुसार अलग-अलग दंड का प्रावधान किया गया है।
- सामान्य मामलों में बल, प्रलोभन या धोखाधड़ी से धर्म परिवर्तन कराने पर 7 से 10 वर्ष तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माना लगाया जाएगा।
- यदि पीड़ित महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) या अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से संबंधित है, तो दोषी को 10 से 20 वर्ष तक के कठोर कारावास की सजा दी जा सकती है।
- सामूहिक धर्मांतरण कराने वाले गिरोह, सिंडिकेट या संगठनों के खिलाफ आजीवन कारावास और 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
धर्म परिवर्तन के लिए पूर्व सूचना अनिवार्य
कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे धर्म परिवर्तन से कम से कम 60 दिन पहले संबंधित जिला मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) को लिखित सूचना देना अनिवार्य होगा। धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया कराने वाले पुजारी, मौलवी, पादरी या अन्य धार्मिक अनुष्ठान कराने वाले व्यक्ति को भी प्रशासन को पूर्व सूचना देनी होगी।
धर्मांतरण के उद्देश्य से हुई शादी हो सकती है शून्य
अधिनियम में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि विवाह केवल धर्म परिवर्तन कराने के उद्देश्य से किया गया था, तो सक्षम अदालत ऐसी शादी को शून्य (अमान्य) घोषित कर सकेगी।
विशेष अदालतों में होगी सुनवाई
धर्मांतरण से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए प्रत्येक जिले में विशेष अदालतें (स्पेशल कोर्ट) गठित की जाएंगी। कानून के अनुसार ऐसे मामलों की सुनवाई अधिकतम छह माह के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
‘घर वापसी’ को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा
अधिनियम में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति अपने मूल धर्म में वापस लौटता है, तो उसे कानून की दृष्टि में धर्मांतरण नहीं माना जाएगा। ऐसे मामलों पर इस अधिनियम के प्रावधान लागू नहीं होंगे।
राजपत्र में अधिनियम के प्रकाशित होने के बाद राज्य का गृह विभाग और प्रशासनिक अमला नए प्रावधानों के तहत अवैध धर्मांतरण से जुड़े मामलों पर कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है।











