Monday, October 5, 2026

निजी अस्पताल में पहाड़ी कोरवा महिला की मौत, 3 दिन से टाला जा रहा था ऑपरेशन, पहली थी जिला अस्पताल में भर्ती

कोरबा के जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी के लिए लंबे वर्षों से प्रयास तो किया जा रहा है लेकिन स्थानीय उदासीनता की वजह से यहां आने वाले अनेक मरीज उपचार लाभ की बजाय निजी अस्पतालों में रेफर किए जा रहे हैं। दलालों के हावी होने से जिला अस्पताल को रेफरल सेंटर बनाकर रख दिया गया है जिसका खामियाजा राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र एक पहाड़ी कोरवा महिला को अपनी जान गंवाकर भुगतना पड़ा है। महज हाथ में फैक्चर आने की तकलीफ का इलाज जिला अस्पताल में संभव नहीं हो पाया और निजी अस्पताल में 3 दिन से ऑपरेशन की राह तक रही महिला की मौत गई। यह गंभीरता और घोर लापरवाही पूर्ण मामला है जिसे भी लीपापोती कर निपटाने की कोशिश होने लगी है।

कोरबा जिले के ग्राम सतरेंगा के आश्रित मोहल्ला कोराईपारा निवासी सुनीबाई कोरवा 50 वर्ष हाथ में फ्रैक्चर के इलाज के लिए 9 फरवरी को अपने बेटे के साथ जिला अस्पताल आई थी। परिजनों का कहना है कि महिला को यहां से कुछ दलाल उन्हें बकायदा गाड़ी में बिठा कर निजी अस्पताल गीता देवी मेमोरियल ले आए जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने ऑपरेशन की बात कही लेकिन 3 दिन तक ऑपरेशन नहीं हुआ। ऑपरेशन की तिथि को लगातार आगे बढ़ाया गया। आपरेशन के नाम पर महिला को 3 दिनों तक भूखे-प्यासे रखा गया और आखिरकार शुक्रवार और शनिवार की दरम्यानी रात लगभग 1 बजे महिला ने दम तोड़ दिया।