Tuesday, April 28, 2026

नीलकंठ कंपनी के 75 श्रमिकों ने थामा कोयला मजदूर सभा का दामन

जमुना-कोतमा। जमुना-कोतमा क्षेत्र के श्रमिक हितों को लेकर रविवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें कोयला मजदूर सभा के केंद्रीय महामंत्री का क्षेत्र में आगमन हुआ। उनके आगमन पर क्षेत्रीय पदाधिकारियों ने स्वागत किया तथा श्रमिकों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर औपचारिक बैठक संपन्न हुई। बैठक में क्षेत्र के कामगारों की समस्याओं, वेतन विसंगतियों, श्रमिक अधिकारों और ठेका कंपनियों की कार्यप्रणाली पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के दौरान नीलकंठ कंपनी में कार्यरत लगभग 70 से 75 श्रमिकों ने केंद्रीय महामंत्री से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं। इस अवसर पर इन श्रमिकों ने कोयला मजदूर सभा की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण कर संगठन के प्रति अपना विश्वास व्यक्त किया। श्रमिकों ने बताया कि नीलकंठ कंपनी द्वारा उन्हें एचपीसी कमेटी के निर्धारित मानकों के अनुरूप भुगतान नहीं किया जा रहा है, जिससे वे लंबे समय से आर्थिक शोषण का सामना कर रहे हैं।

श्रमिकों ने आरोप लगाया कि कंपनी प्रबंधन एचपीसी कमेटी की गाइडलाइन के अनुरूप मजदूरी भुगतान करने में लगातार मनमानी कर रहा है। इससे श्रमिकों और उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। श्रमिकों ने केंद्रीय नेतृत्व से मांग की कि इस गंभीर विषय में हस्तक्षेप कर उचित न्याय दिलाया जाए।

मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय महामंत्री ने श्रमिकों को आश्वस्त किया कि नीलकंठ कंपनी के कामगारों के हितों की रक्षा के लिए संगठन शीघ्र ठोस कदम उठाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कंपनी प्रबंधन को एचपीसी रेट के अनुसार सभी श्रमिकों का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए बाध्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के हक पर किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और संगठन हर स्तर पर मजदूरों की लड़ाई मजबूती से लड़ेगा।

बैठक के दौरान क्षेत्रीय अध्यक्ष ने उपस्थित श्रमिकों, पदाधिकारियों एवं केंद्रीय महामंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना है और क्षेत्र के हर मजदूर की आवाज को मजबूती से उठाया जाएगा।

इस बैठक को क्षेत्र के श्रमिक आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नीलकंठ कंपनी के श्रमिकों का बड़ी संख्या में संगठन से जुड़ना आने वाले समय में क्षेत्रीय श्रमिक राजनीति और मजदूर हितों की लड़ाई को नई दिशा दे सकता है। श्रमिकों में इस बैठक के बाद उत्साह और उम्मीद का माहौल देखा गया।