कोरबा। चाइना से आई आफत ने विश्व के साथ-साथ देश की भी काफी नुकसान पहुंचाया है, कोरोना के पहले लहर ने जहां लोगों की जान ली, वही दूसरी लहर ने जनहानि के साथ-साथ भारत की अर्थव्यवस्था को भी काफी नुकसान पहुंचाया। तीसरे लहर के दस्तक देने के साथ सरकार ने ऐलान किया कि अब बूस्टर डोज देकर लोगों की जान कोरोना से बचाई जाएगी लेकिन पहले फेहरिस्त में फ्रंटलाइन वर्करों को शामिल किया गया जो करोनाकाल में आम नागरिकों की जान की रक्षा करते हैं, और इनके साथ ही 60 साल की आयु पार कर चुके लोगों को भी बूस्टर डोज देने की व्यवस्था शासन द्वारा की गई लेकिन जहां सवाल उठना लाजमी है कि करोना क्या सिर्फ फ्रंटलाइन वर्करों को ही हो सकता है, या फिर इससे कोई 60 साल से कम वाला नागरिक प्रभावित नहीं होगा। अभी फिलहाल तीसरी लहर की पिक समाप्ति की ओर है लेकिन फिर भी शासन को चाहिए कि वह फ्रंटलाइन वर्करों के साथ-साथ आम नागरिकों के लिए भी बूस्टर डोस की समुचित व्यवस्था करें यह मांग है कोरबा जिले के समाजसेवी केदारनाथ अग्रवाल की।
श्री केदारनाथ अग्रवाल का कहना है कि कोरोना से आम नागरिक भी उतना ही प्रभावित होता है जितना कि एक 60 आयु वर्ग को पार कर चुका व्यक्ति इसलिए उनके लिए भी बूस्टर डोस की समुचित व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि कोरोना रूपी राक्षस से बचा जा सके।
मैसेज आने के बाद भी नही दिया गया बूस्टर डोज एक तो कोरोना का भय उसके ऊपर भी अगर बूस्टर डोस के लिए मैसेज आने के बाद अगर वैक्सीन नहीं लगाई जाए तो इसका जवाबदेह कौन होगा, यह सवाल है कोरबा जिले के आम नागरिकों का । क्योंकि कोरबा जिले के सीएसईबी अस्पताल में कई लोगों को मैसेज आने के बाद भी बूस्टर डोस नहीं लगाया गया। इन लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि यदि उन्हें मैसेज आया है तो उन्हें भी बूस्टर डोस प्रदान किया जाए अन्यथा भ्रम की स्थिति पैदा करने वालों के ऊपर उचित कार्रवाई की जाए , क्योंकि कोरोना काल में घर से निकलना वैसे भी खतरे से खाली नहीं है ऐसे में बूस्टर डोस के लिए भीड़ में लंबी लाइन लगाने के कारण उन्हें और उनके परिजनों पर कोरोना का खतरा और बढ़ गया है।









