Thursday, April 30, 2026

महादेव सट्‌टा केस… सुनवाई में दाऊद इब्राहिम की एंट्री:छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में प्रमोटर के वकील बोले-ED ने गलत जानकारी दी; वारंट रद्द करें

महादेव सट्‌टा ऐप प्रमोटर-संचालक सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के गिरफ्तारी वारंट केस में मोस्ट वांटेड आतंकी दाऊद इब्राहिम की एंट्री हुई है। आरोपियों के वकील ने सुनवाई के दौरान एक केस का जिक्र करते हुए वारंट रद्द करने की मांग की है। वकील ने कहा कि ED ने कोर्ट को गलत जानकारी दी।

दरअसल, सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ ED कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया है। इसी वारंट को आरोपियों ने वरिष्ठ एडवोकेट कपिल सिब्बल और किशोर श्रीवास्तव के जरिए बिलासपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मामले की सुनवाई जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

महादेव सट्‌टा प्रमोर्टस के गैर जमानत मामले की सुनवाई करते न्यायधीश।
महादेव सट्‌टा प्रमोर्टस के गैर जमानत मामले की सुनवाई करते न्यायधीश।

 

रवि उप्पल के वकील ने किशोर श्रीवास्तव जज के सामने ED की FIR पढ़ी। FIR पढ़ने के दौरान ED पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया। रवि उप्पल के अधिवक्ता ने कहा कि FIR में जिन बातों का उल्लेख है, उन बातों की ऐप्लीकेशन कोर्ट में सब्मिट नहीं की गई है।

उन्होंने गुरुवार को कहा, न्यायधीश ने नोटिस जारी करते समय कथित अभियुक्त बताया, लेकिन ED ने अपनी FIR में अभियुक्त लिखा है। ये दोनों अलग-अलग बातें हैं।​ ​​​​​​ED ने गलत जानकारी देकर कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी कराया है। इसे रद्द कर देना चाहिए।

वकील किशोर श्रीवास्तव ने अपने तथ्यों को सही साबित करने के लिए पुराने कई केस का रिफ्रेंस दिया। इनमें से एक केस दाऊद इब्राहिम से जुड़ा हुआ भी है। वहीं ED की तरफ से अधिवक्ता सौरभ पांडेय और अधिवक्ता जोहेब हुसैन ने बहस की।

वारंट मामले में शुक्रवार को दोबारा सुनवाई होगी। ED के अधिवक्ताओं का कहना है कि बहस की प्रक्रिया में और कई दिन लग सकते हैं। इससे पहले बुधवार को भी अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सौरभ चंद्राकर का पक्ष रखा था और फिर प्रदेश से रवाना हो गए थे।

कपिल सिब्बल ने बुधवार को हाईकोर्ट में कहा, ED कोर्ट यह निर्देशित नहीं कर सकती कि सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल को गिरफ्तार करें। ये कोर्ट अपने क्षेत्राधिकार के लिए कानूनी अधिकार से संपन्न है, ले न क्षेत्र के बाहर ऐसा नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि महादेव ऐप के दोनों संचालक वानूआतू के नागरिक हैं। पढ़ें पूरी खबर…

ईडी ने कार्रवाई करके फ्रीज की है 580 करोड़ की संपत्ति
ईडी ने कार्रवाई करके फ्रीज की है 580 करोड़ की संपत्ति

 

महादेव सट्टा एप केस में एक मार्च 2024 तक प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों ने कार्रवाई करके 580 करोड़ रुपए की संपत्ति फ्रीज की है। ED ने रायपुर, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, इंदौर, गुरुग्राम के कुल 15 ठिकानों पर दबिश दी है।

इस मामले में आरोपियों को अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार भी किया है। ED ने छत्तीसगढ़ में पूर्व सीएम सहित 19 नामजद आरोपियों, ब्यूरोक्रेट्स, पुलिस अधिकारी और अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की है।

ED करीब एक साल से महादेव ऐप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही है। आरोप है कि इसमें छत्तीसगढ़ के उच्च पदस्थ राजनेताओं और नौकरशाहों के शामिल होने का पता चला है। ऐप के दो मुख्य प्रमोटर भी छत्तीसगढ़ से ही हैं। ED के अनुसार, इस मामले में करीब 6,000 करोड़ रुपए की आय आंकी गई है।

  • पूर्व सीएम भूपेश बघेल
  • सौरभ चंद्राकर
  • रवि उप्पल
  • शुभम सोनी
  • चंद्रभूषण वर्मा
  • आसीम दास
  • सतीश चंद्राकर
  • नीतीश दीवान
  • अनिल कुमार अग्रवाल
  • विकास छापरिया
  • रोहित गुलाटी
  • विशाल आहूजा
  • धीरज आहूजा
  • अनिल कुमार दम्मानी
  • सुनील कुमार दम्मानी
  • भीम सिंह यादव
  • हरिशंकर टिंबरेवाल
  • सुरेंद्र बागड़ी
  • सूरज चोखानी
  • संबंधित अज्ञात ब्यूरोक्रेट्स
  • पुलिस अफसर और OSD
एसीबी ने अपने प्रतिवेदन में हवाला के जरिए प्रोटेक्शन मनी आदान प्रदान होने का उल्लेख किया है।
एसीबी ने अपने प्रतिवेदन में हवाला के जरिए प्रोटेक्शन मनी आदान प्रदान होने का उल्लेख किया है।

ED का आरोप है कि महादेव बुक के ऑपरेटर के जरिए हवाला से पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और राजनेताओं तक प्रोटेक्शन मनी पहुंचाई जाती थी। इन अफसरों और नेताओं ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए प्रमोटर्स से आर्थिक लाभ प्राप्त करते हुए अवैध संपत्ति अर्जित की। ED ने कई अचल संपत्तियों को प्रोविजनल अटैच किया है।

EOW में इन सभी आरोपियों पर 4 मार्च को आपराधिक षड्यंत्र रचने, धोखाधड़ी में धारा 120 बी, 34, 406, 420, 467, 468 471 धारा 7, 11 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988, संशोधित भ्रष्टाचार निरोधक (संशोधन) अधिनियम 2018 का अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया गया।