रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति इन दिनों असामान्य हलचल के दौर से गुजर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार में संभावित कैबिनेट फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सत्ता के गलियारों में उठती फुसफुसाहट अब खुलकर सामने आने लगी है। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में मंत्रिमंडल की तस्वीर बदल सकती है।
सरगुजा से बस्तर तक बढ़ी हलचल
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार सरगुजा संभाग के कुछ मंत्रियों के प्रदर्शन को लेकर समीक्षा चल रही है। परफॉर्मेंस के आधार पर विभागों में बदलाव या जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया जा सकता है। वहीं बस्तर क्षेत्र से नए सियासी समीकरण उभरते नजर आ रहे हैं। खासतौर पर महिला प्रतिनिधित्व को लेकर पार्टी के भीतर मंथन तेज हो गया है। माना जा रहा है कि इस बार कैबिनेट में महिला मंत्रियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है, ताकि सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधा जा सके।
अनुभव बनाम नए चेहरों का समीकरण
जहां एक ओर नए चेहरों को मौका देने की चर्चा है, वहीं अनुभवी नेताओं की वापसी की संभावना भी बनी हुई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता अजय चंद्राकर का नाम फिर से चर्चा में है। उनके प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक पकड़ को देखते हुए उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा है। संकेत हैं कि पार्टी आगामी चुनाव को ध्यान में रखते हुए अनुभव और युवा नेतृत्व के बीच संतुलन बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।
कांग्रेस में भी अंदरूनी हलचल
सत्तापक्ष के साथ-साथ विपक्षी कांग्रेस में भी हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की भूमिका को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है, जिससे प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति बन सकती है। पार्टी अब जमीनी स्तर पर संगठन मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
2028 चुनाव की तैयारी का संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संभावित फेरबदल केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारी का हिस्सा हो सकता है। भाजपा जहां सामाजिक समीकरण साधने में जुटी है, वहीं कांग्रेस संगठनात्मक मजबूती पर फोकस कर रही है।
फिलहाल स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन इतना तय है कि छत्तीसगढ़ की सियासत में बदलाव की आहट तेज हो चुकी है। आने वाले दिनों में यह सस्पेंस और गहराने की संभावना है।








