नई दिल्ली। देशभर में 1 अप्रैल 2026 से दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी होने जा रही है। इसका असर सीधे आम जनता की जेब पर पड़ेगा। बुखार, दर्द, ब्लड प्रेशर (BP) और डायबिटीज जैसी रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली जरूरी दवाएं महंगी होंगी। यह फैसला सरकार के अधीन कार्यरत राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) द्वारा लिया गया है।
1000 से ज्यादा आवश्यक दवाओं के बढ़ेंगे दाम
NPPA ने राष्ट्रीय आवश्यक दवा सूची (NLEM) में शामिल दवाओं की कीमतों में करीब 0.6% तक बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। इसके बाद देशभर में 1000 से अधिक जरूरी दवाएं महंगी हो जाएंगी, जिनका उपयोग बड़ी संख्या में मरीज नियमित रूप से करते हैं।
इन दवाओं पर पड़ेगा सीधा असर
कीमत बढ़ने का असर कई प्रमुख दवाओं पर देखने को मिलेगा—
- बुखार और दर्द की दवाएं: पैरासिटामोल, इबुप्रोफेन, डिक्लोफेनाक
- डायबिटीज और BP की दवाएं: मेटफॉर्मिन, ग्लिमेपाइराइड, एमलोडिपिन, टेल्मिसर्टन
- दिल और कोलेस्ट्रॉल की दवाएं: एटोरवास्टैटिन, एस्पिरिन
- पेट और सांस संबंधी दवाएं: पैंटोप्राजोल, ओमेप्राजोल, सालबुटामोल
- एंटीबायोटिक्स: एमोक्सिसिलिन, अजीथ्रोमाइसिन, सिप्रोफ्लोक्सासिन
इसके अलावा विटामिन, आयरन सप्लीमेंट्स, कुछ कैंसर रोधी दवाएं और वैक्सीन भी इस सूची में शामिल हैं।
कितना बढ़ेगा दाम?
दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी सीमित रहेगी। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी दवा की कीमत पहले 100 रुपए थी, तो अब वह लगभग 100.65 रुपए में मिलेगी। हालांकि यह बढ़ोतरी छोटी है, लेकिन जो मरीज कई दवाएं नियमित लेते हैं, उनके मासिक खर्च में बढ़ोतरी महसूस हो सकती है।
NLEM के बाहर की दवाएं और महंगी हो सकती हैं
जो दवाएं NLEM सूची में शामिल नहीं हैं, उनके दाम दवा कंपनियां सालाना 10% तक बढ़ा सकती हैं, जिससे कुछ दवाओं की कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी संभव है।








