छत्तीसगढ़ की पबिया, पविया, पवीया जाति के लोग आदिवासी समुदाय से आते हैं। लेकिन इन्हें आदिवासियों को मिलने वाली कई सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। इसकी वजह यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में इनकी जातियों के नाम मात्रात्मक गलतियों के साथ लिख दिए गए।
सोमवार को इन आदिवासियों ने छत्तीसगढ़ विधानसभा पहुंचकर प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात की। इनकी समस्या सुनकर मुख्यमंत्री ने इन्हें अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा है। इन्हें पाव जाति में शामिल किया जाएगा।
भारत सरकार को भेजा प्रस्ताव
छत्तीसगढ़ में इस समुदाय की जाति को पबिया, पविया, पवीया जाति के नाम से पुकारा जाता है। प्रदेश भर से आए पाव, पबिया, पविया, पवीया जाति के प्रतिनिधि मंडल ने विधायक रामकुमार यादव के साथ CM साय से मुलाकात की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि लंबे समय से अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल करने की मांग थी। राज्य शासन द्वारा अनुशंसा सहित प्रतिवेदन भारत सरकार को भेजा गया है। उम्मीद है इसका सकारात्मक परिणाम आएगा।

MP के जमाने से अटकी है समस्या
ग्रामीणों ने बताया कि मध्य प्रदेश के समय उन लोगों के अनुसूचित जनजाति के प्रमाण पत्र बन रहे थे। लेकिन बाद में सरकारी रिकॉर्ड में मात्रात्मक त्रुटि के कारण पिछले 22 सालों से प्रमाण पत्र बनना बंद हो गए। इसकी वजह से इस समाज के बच्चों को अनुसूचित जनजाति वर्ग को मिलने वाले लाभ नहीं मिल पा रहे हैं। हमारे बच्चे पढ़ाई-लिखाई में आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
इन विधानसभा क्षेत्रों में इनका प्रभाव
छत्तीसगढ़ सरकार की जारी की गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक प्रदेश में इनकी जनसंख्या लगभग 22 हजार है। प्रमुख रूप से चंद्रपुर, रायगढ़, लैलूंगा, खरसिया, पेंड्रा, मरवाही और जशपुर जैसी विधानसभा इलाकों में इस समाज के बड़ी तादाद में मतदाता हैं।











