Tadmetla Naxal Attack को देश के सबसे बड़े सीआरपीएफ नरसंहारों में गिना जाता है। वर्ष 2010 में हुए इस भीषण नक्सली हमले में 75 सीआरपीएफ जवान और एक राज्य पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। लेकिन घटना के 16 साल बाद भी किसी आरोपी का दोष साबित नहीं हो सका। अब Chhattisgarh High Court ने भी सभी आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा है।
मुख्य न्यायाधीश Ramesh Sinha और न्यायमूर्ति Ravindra Kumar Agrawal की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट के बरी करने वाले फैसले को चुनौती दी गई थी।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में जांच एजेंसियों और अभियोजन की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि इतने बड़े हमले के बावजूद जांच एजेंसियां असली हमलावरों की पहचान तक साबित नहीं कर सकीं। मामले में प्रत्यक्ष सबूतों की भारी कमी रही और जांच में कई गंभीर प्रक्रियागत खामियां पाई गईं।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य पेश करने में विफल रहा। यही वजह है कि ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता।
ताड़मेटला हमला देश के सबसे दर्दनाक नक्सली हमलों में से एक माना जाता है। इस घटना में बड़ी संख्या में जवानों की शहादत ने पूरे देश को झकझोर दिया था। अब 16 साल बाद भी दोष तय नहीं हो पाने पर कोर्ट ने इसे बेहद पीड़ादायक स्थिति बताया है।







