कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन का खतरा सिर पर है। आशंका जताई जा रही है कि ये वैरिएंट डेल्टा से भी खतरनाक है और वैक्सीन को भी बेअसर कर सकता है। डेल्टा वैरिएंट की वजह से ही भारत में भयावह दूसरी लहर आई थी। अब तक ये वैरिएंट 15 से भी ज्यादा देशों में फैल चुका है। अगर ये वैरिएंट भारत में फैलता है, तो नतीजे खतरनाक हो सकते है।
दूसरी लहर के दौरान देश को हॉस्पिटल बेड, वेंटीलेटर, ऑक्सीजन से लेकर दवाओं की कमी से भी जूझना पड़ा था। अब जब कोरोना का नया वैरिएंट दुनियाभर में फैल रहा है तो भारत में भी तीसरी लहर का खतरा मंडराने लगा है।
अप्रैल 2020 में नेशनल हेल्थ मिशन ने राज्यों को लेटर लिखा था। इसमें कहा गया था कि एक रेगुलर बेड पर एडमिट मरीज को एक मिनट में 7.14 लीटर ऑक्सीजन की जरूरत होती है। वहीं, ICU में एडमिट एक मरीज को एक मिनट में 11.90 लीटर ऑक्सीजन की जरूरत होती है। राज्य इसी आधार पर अपनी ऑक्सीजन की जरूरत को कैलकुलेट करें।
हालांकि, इसी साल अप्रैल और जून में सरकार ने इस गाइडलाइन में बदलाव किया। जून में जारी गाइडलाइन के मुताबिक, ICU में एडमिट एक मरीज के लिए हर मिनट 30 लीटर और रेगुलर मरीज के लिए हर मिनट 10 लीटर ऑक्सीजन की जरूरत बताई गई।
केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि वे दूसरी लहर की पीक के दौरान मिले केसेज से 1.25 गुना ज्यादा केसेज को ध्यान में रखकर तैयारी करें। दूसरी लहर के पीक के दौरान भारत में एक दिन में 4 लाख से ज्यादा केसेज मिले थे।
साथ ही केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि तीसरी लहर के दौरान कुल मरीजों के करीब 23% को हॉस्पिटलाइजेशन की जरूरत पड़ सकती है। राज्य सरकारें इसी हिसाब से तैयारी करें। जुलाई 2021 में लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए सरकार ने बताया था कि पहली लहर की पीक के दौरान हर दिन 3,095 टन ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी थी। दूसरी लहर के दौरान इसमें करीब 3 गुना की बढ़ोतरी हुई और हर दिन 9 हजार टन ऑक्सीजन की जरूरत थी।
देश में अभी सबसे ज्यादा केस केरल और महाराष्ट्र में मिल रहे हैं। समझते हैं, ये दोनों राज्य तीसरी लहर से निपटने के लिए किस तरह तैयारी कर रहे हैं…
कुल एक्टिव केसेज के लिहाज से केरल देश में टॉप पर है। राज्य एक दिन में करीब 550 टन ऑक्सीजन का प्रोडक्शन कर सकता है। अगस्त में जब केरल में सबसे ज्यादा केस मिल रहे थे, तब राज्य में हर दिन करीब 110 टन ऑक्सीजन का कंजम्प्शन हो रहा था। इस लिहाज से केरल ने अपनी ऑक्सीजन प्रोडक्शन कैपेसिटी को 5 गुना बढ़ाया है।
दूसरी लहर के पीक के दौरान महाराष्ट्र में एक्टिव केस 6 लाख से भी ज्यादा हो गए थे। तब राज्य को हर दिन करीब 1700 टन ऑक्सीजन की जरूरत थी। तीसरी लहर को देखते हुए राज्य में 619 PSA लगाने की तैयारी है, जिसमें से 150 इंस्टॉल किए जा चुके हैं। साथ ही ऑक्सीजन स्टोरेज कैपेसिटी को भी करीब 3 हजार टन कर लिया गया है।









