Thursday, September 24, 2026

काले खेल से लाल हो रहे कोल माफिया, लाखों के स्टाक से मिला केवल 50 हजार का कोयला, क्या कार्रवाई के नाम पर हो रही हैं खानापूर्ति, स्थानीय पुलिस कर्मी भी आए रेडार पर…

कोरबा वाह वाही लुटने के चक्कर में अपनी लुटिया डूबा बैठे हरदीबाजार के कुछ पुलिस कर्मी। पिछले दिनों मलंगाव क्षेत्र के आसपास अवैध कोयले के भंडारण की खबर KNN ने प्रकाशित की थी। इसके बाद एसपी भोजराम पटेल ने कार्रवाई के निर्देश के दिए थे। हरदीबाजार पुलिस के कुछ कर्मियों ने मौके पर पहुंच कर छापामार कार्रवाई की। लेकिन इस कार्रवाई को खानापूर्ति कहना गलत नहीं होगा। हरदीबाजार के मलगांव में कोल माफियाओं ने लाखों के अवैध कोयले का भंडारण कर रखा है। लेकिन इस भंडार से स्थानीय पुलिस को केवल 25 टन कोयला ही मिला। ये हम नहीं बल्कि तस्वीर कह रही हैं
आखिर ऐसी क्या मजबूरी रही होगी कि कोयले की मंडी से केवल 50 हजार के कोयले की जप्ती पुलिस ने की होगी। कोरबा जिले के मलंगाव खदान के पास अवैध कोयले का भंडारण किया गया है। पिछले दिनों स्थानीय प्रेस कर्मियों ने संबंधित क्षेत्र की तस्वीर वायरल की थी। जिसके बाद एसपी भोजराम पटेल ने जांच कार्रवाई के निर्देश दिए थे। क्योकि निर्देश एसपी के थे , तो कार्रवाई तो करनी ही पड़ती। लिहाजा स्थानीय पुलिस ने कार्रवाई का डंडा चलाया और कर ली कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति।
हम खानापूर्ति इसलिए कह रहे हैं कि क्योकि हमारे पास जो तस्वीर मौजूद हैं उसमे साफ तौर पर आप भी देख सकते हैं कि भरपूर मात्रा में कोयला उक्त क्षेत्र में रखा गया है। लेकिन पुलिस ने केवल 50 हजार का माल ही जप्त किया है। कार्रवाई के अंदाज से स्थानीय लोगों ने संबंधित पुलिस पर मिलीभगत का भी आरोप लगाया है।
ये वही मलगांव जहां पिछले दिनों खबर कवरेज करने के दौरान पत्रकारों पर कोयला चोरो ने प्राणघातक हमला किया। इस मामले को लेकर रामपुर विधायक ननकीराम कंवर ने भी सीएम से मामले की शिकायत करने की बात कही थी। फिलहाल मामले की जांच जारी है। लेकिन जिस तरह से मलगांव के आसपास कोयला तस्कर सक्रिय हैं, और खुलेआम कोयले का काला खेल खेला जा रहा हैं उससे इस मामले में सफेदपोशो के संलिप्तता से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति का खेल पुलिस विभाग अकेले नहीं खेल रहा, बल्कि इस खेल में एसईसीएल विभाग के कुछ अफसर भी इसमें शामिल हैं । तभी तो दीपका व गेवरा खदान के जीएम सब कुछ जानने के बाद भी केवल तमाशबीन की भूमिका निभा रहे है। स्थानीय प्रेस द्वारा बार बार मलगांव के पास अवैध कोयले के भंडारण की खबर को दिखाता हैं, लेकिन कोल खदान के अधिकारी इस पर ध्यान नहीं देते। उनका लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाने तक ही सिमित हैं। खदान की सुरक्षा उन्होने भगवान भरोसे छोड़ दी है।