
कोरबा: रेत माफिया और खनिज विभाग के अधिकारियों पर शासन प्रशासन का नियंत्रण नहीं है यही वजह है कि ठेकेदार विभाग के अधिकारियों से सांठगांठ कर घाट को मनमानी ढंग से संचालित कर रहे हैं।
ठेका के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए शासन प्रशासन द्वारा निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बिना रॉयल्टी की रेत बेचा जा रहा है जिसकी वजह से जरूरतमंदों को ऊंचे दामों पर उपलब्ध हो रहे हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शाम के वक्त रेत खाट गुलजार हो जाते हैं। जिसके बाद नियमों को दरकिनार करते हुए रेत की निकासी की जाती है । इस भर्राशाही की जानकारी संबंधित विभाग को भी है पर निश्चित चढ़ावे के चक्कर में अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।
रेत तस्करी का मामला शहर में कोई नया मामला नहीं है । इससे पहले भी कई मौकों पर केएनएन की टीम के द्वारा अवैध रेत निकासी के संबंध में खबरें प्रकाशित की गई। कई बार कार्यवाही की गई,,लेकिन फिर वही ढर्रा शुरू हो जाता है जिसकी वजह से अधिकारी तो मालामाल होते हैं लेकिन राजस्व को काफी नुकसान होता है।
पिछले दिनों 4 ट्रैक्टरों पर विभाग ने कार्रवाई की थी । लेकिन शहर की सड़कों पर बेधड़क बिना रॉयल्टी की दौड़ने वाले वाहनों के मुकाबले की गई कार्रवाई ऊंट के मुंह में जीरे वाली कहावत को चरितार्थ करती है ।
लोगों ने बताया कि दिखावे के तौर पर यह कार्रवाई की गई । अगर विभाग सही तरीके से कार्रवाई करता तो उन्हें 1500 में उपलब्ध होने वाला ट्रैक्टर ट्रैक्टर 3000 में नहीं खरीदना पड़ता।
बहरहाल खनिज विभाग के नुमाइंदे इस खबर के बाद होश में आते हैं,, या फिर चढ़ावा रूपी भांग खाकर मदहोश रहते हैं यह देखने वाली बात होगी । लेकिन जिस प्रकार से जिले में रेत का खेल चल रहा है उससे माफिया और अधिकारी तो मालामाल हैं लेकिन जनता अपने निर्माण कार्यों को लेकर काफी परेशान है। प्रशासनिक अधिकारियों को चाहिए कि वह अपने मातहतों पर नियंत्रण करें साथ ही जनता को राहत प्रदान करें।










