Tuesday, July 7, 2026

डीजल खर्च ज्यादा होने से 3 गुना दाम में मिल रही रेत, प्रक्रिया में उलझे दोनों रेत घाट 30 किमी की दूरी से ला रहे

कोरबा: मानसून की विदाई काे एक माह पूरा हाेने वाला है, लेकिन मानसून की दस्तक के बाद से बंद शहर के दाेनाें रेत खदान अब तक नहीं खुले हैं। वजह स्वीकृति की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है। दरअसल, शासन के नए नियम के तहत रेत घाटाें अब ठेका के बजाए नगरीय निकाय व ग्राम पंचायताें काे साैंपा जाना है। शहर में रेत खनन के लिए दाे घाट माेतीसागरपारा व गेरवाघाट है, जिसमें माेतीसागरपारा रेत घाट की लीज अवधि समाप्त हाे चुकी है।

इसके लिए फिर से स्वीकृति मांगी गई है। वहीं गेवराघाट-2 घाट काे भी स्वीकृति का इंतजार है। शहर में दाेनाें घाट के बंद है और आऊटर में करीब 30 किमी दूर तरदा और भैसामुडा घाट खुले हैं। ऐसे में स्वीकृत खदान से वैध रूप से रेत शहर में लाने के लिए ट्रैक्टर काे 30 किमी दूर जाना पड़ रहा है।

आवाजाही में कुल करीब 60 किमी अतिरिक्त चलना पड़ रहा है। इस कारण 1 हजार रुपए प्रति ट्रैक्टर मिलने वाला रेत अब करीब 3 हजार में मिल रहा है। ज्यादातर ट्रैक्टर मालिक रेत माफियाओं से जुड़कर शहर के आसपास के नदी-नाला के किनारे से रेत खनन कर अवैध रूप से खपाकर ज्यादा कमाई कर रहे हैं।

खनिज की टीम रात में कर रही निगरानी
शहर के रेत घाट काे स्वीकृति नहीं मिलने से मुख्यत: रात के समय ट्रैक्टर में रेत खपाया जाता है। इसे राेकने के लिए खनिज विभाग की दाे टीम गठित की गई है। पिछले 3-4 दिनाें में विभाग ने शहर के सीतामणी, राताखार, कुसमुंडा, कपाेट, उरगा व बालकाे में ऐसे 6 ट्रैक्टर पकड़कर कार्रवाई की है, जिससे रेत माफिया के बीच हडकंप मच गया है।

रेत घाट खुले ताे 1 हजार प्रति ट्रैक्टर में लोगों को मिलेगी रेत
शहर के दाेनाें रेत घाट खुलने पर अभी जाे रेत 2 से 3 हजार रुपए प्रति ट्रैक्टर में लाेग खरीद रहे हैं। उन्हें 1 हजार रुपए प्रति ट्रैक्टर में मिलेगा, क्याेंकि नगरीय निकाय के जिम्मे हाेने से रायल्टी के अलावा अतिरिक्त काेई शुल्क नहीं लगेगा। ऐसे में रेत की कीमत डीजल खर्च निकालकर करीब 1 हजार रुपए प्रति ट्रैक्टर पड़ेगी। इस तरह आमजन जाे मकान या अन्य निर्माण कार्य, मरम्मत कार्य करवा रहे हैं। उन्हें आर्थिक बचत हाेगी।

किस्त पटाने की मजबूरी, इसलिए कर रहे रेत का अवैध परिवहन
सीतामणी निवासी एक ट्रैक्टर मालिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब शहर में स्वीकृत रेत घाट चल रहा था। तब कमाई के लिए फाइनेंस में 2 ट्रैक्टर खरीदा था। रेत घाट लंबे समय से बंद हाेेने से किश्त पटाना मुश्किल हाे गया था। ऐसे में किश्त पटाने की मजबूरी के चलते रेत का अवैध परिवहन करना पड़ता है। स्वीकृत घाट शहर से 25-30 किमी दूर है, जहां से रेत लाकर बेचने में मुनाफा नहीं हाे रहा है।

गेरवा के घाट काे जल्द मिलेगी स्वीकृति, टीम कर रही कार्रवाई
खनिज अधिकारी प्रमाेद नायक के मुताबिक शहर के दाेनाें रेत खदान में गेरवाघाट काे जल्द स्वीकृति मिलेगी। माेतीसागरपारा घाट की अवधि समाप्त हाे चुकी है। उसे नगरीय निकाय काे साैंपने के संबंध में स्वीकृति मांगी गई है। अभी आऊटर के सभी रेत खदान खुल चुके हैं। जहां से शहर में रेत पहुंच रहा है। अवैध रेत खनन-परिवहन के लिए टीम निगरानी करते हुए लगातार कार्रवाई कर रहे हैं।