Friday, October 16, 2026

स्वाथ्य्य विभाग के लापरवाह जिम्मेदार सरकार को बदनाम करने की रच रहे साजिश

कवर्धा। जिला मुख्यालय से लगभग 22 किलोमीटर दूर भोरमदेव अभयारण्य के प्रतिबंधित क्षेत्र में भारी संख्या में दवाओं का जखीरा बरामद हुआ, इससे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। इन दवाइयों को नक्सलियों ने फेंका या स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों ने या नशेड़ियों के गैंग ने, ये जांच का विषय है। जंगल में बरामद इन दवाओं में सीजीएमएससी की सील व मार्क लगी है। दवाओं मे भारी संख्या में ब्रोमेक्सिन हैड्रोक्लोराइड, पैरासिटामाल, प्रोमेथजीन, मल्टीविटामिन की सिरप, एरीथ्रोमाइसीन, पैरासिटामाल है। खांसी की म्यूकोलिटिक सीरप ब्रोमेक्सिन हैड्रोक्लोराइड जिसका बैच नम्बर BHS20048 उत्पादन तिथि 12/2020 एक्सपाइरी डेट 5/2023 जैसी दवाओं को भी फेंक दिया गया है। क्षेत्र में चर्चा है कि मरीजों को बांट जाने वाली जीवनरक्षक दवाओं को मरीजों व जरूरतमंदों को देने की जगह खपत दिखाने जंगलों में फेंक दिया है।
जानकारी के मुताबिक, सर्दी खांसी व अलर्जी की दवाओं ब्रोमेक्सिन और प्रोमेथजीन का उपयोग नशेड़ी नशे के लिए भी करते हैं। वहीं एरीथ्रोमाइसीन एन्टीबायोटिक के रूप में उपयोगी है। जानकारों के अनुसार, यह दवाएं सरकारी अस्पताल में सर्दी खांसी व बुखार के मरीजों को वितरित करने के लिए सरकारी संस्था सीजीएमएससी द्वारा भेजी जाती है। और जिस जिले या वहां के अस्पताल में यह दवाएं मरीजों को जाती हैं या उन क्षेत्रों की वहां की मितानिन, एएनएम तथा महिला हेल्थ वर्करों द्वारा अपने-अपने क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं को ये दवाएं व गोलियां मुफ्त वितरित करती हैं।अब सवाल उठता है कि लाखों रुपये की यह गोलियां कहां से आई, किसके द्वारा मादघाट के प्रतिबंधित जंगलों में फेंकी गई, इनका वितरण क्यों नहीं कराया गया।