Sunday, August 2, 2026

हसदेव जंगल में पेड़ों की कटाई पर विपक्ष का हंगामा:छत्तीसगढ़ विधानसभा में जमकर नारेबाजी; स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की मांग खारिज

रायपुर.छत्तीसगढ़ विधानसभा में हसदेव के जंगलों में पेड़ों की कटाई के मुद्दे पर विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। विपक्ष ने सदन में स्थगन प्रस्ताव लाकर चर्चा की मांग की थी, जिसे स्पीकर ने अस्वीकार कर दिया। इसके बाद विपक्षी विधायकों ने गर्भगृह में जमकर नारेबाजी की। जिसके बाद नारेबाजी करने वाले विधायक निलंबित होगए। हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही 5 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।

मामले में विपक्ष ने दोबारा चर्चा की मांग की। इस पर बीजेपी विधायक सुशांत शुक्ला ने पुरानी सरकार से कुछ सवाल किया तो पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजेपी सदस्य चाहते हैं तो इस पर चर्चा होनी चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा- आसंदी की व्यवस्था आने के बाद भी विपक्ष की मांग उचित नहीं है। सदन में चर्चा के पर्याप्त मौके मिलेंगे।

अजय चंद्राकर ने तेलीबांधा से VIP रोड तक सौंदर्यीकरण में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया।
अजय चंद्राकर ने तेलीबांधा से VIP रोड तक सौंदर्यीकरण में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया।

सरकार बनने से पहले ही वन विभाग ने दी पेड़ काटने की अनुमति

नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत ने कहा- हसदेव क्षेत्र में सभी कोल ब्लॉक रद्द करने को लेकर इस सदन में ही 26 जुलाई 2022 को संकल्प पारित किया गया। केंद्र सरकार को पत्र भेजा गया था, इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। सरकार बनने और मुख्यमंत्री बनने से पहले ही वन विभाग ने हसदेव में 15 हजार 307 पेड़ काटने की अनुमति दे दी।

विधानसभा ने अशासकीय संकल्प पारित कर दिया था। इसके बाद भी इस तरह का आदेश जारी करना दुखद है। ये गंभीर समस्या है। हसदेव के खत्म होने से बांगो बांध का अस्तित्व खत्म हो जाएगा।

किस अदृश्य शक्ति ने दी पेड़ काटने की अनुमति

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा- इसी सदन में सर्व सम्मति से अशासकीय संकल्प पारित किया गया था। इसके बाद भी कटाई की अनुमति दे दी गई। ये कौन सी अदृश्य शक्ति है जिसने पेड़ों की कटाई की अनुमति दे दी गई। इससे वन्य जीव प्रभावित होंगे। स्थानीय आदिवासी प्रभावित होंगे। बांगो बांध प्रभावित होने की वजह से कई जिलों में सिंचाई पर असर होगा।

कांग्रेस विधायक कुंवर निषाद और विक्रम मंडावी ने कहा- जंगल खत्म होने से जन जीवन प्रभावित होगा। हसदेव में हाथी मानव द्वन्द चल रहा है। क्षेत्र के आदिवासी अपनी बात नहीं रख पा रहे हैं। आदिवासियों के जल जंगल और जमीन पर खतरा मंडरा रहा है।