Sunday, May 10, 2026

DAV स्कूल का नया कारनामा दो बच्चियों को किया स्कूल से बेदखल


कोरबा – DAV स्कूल के प्राचार्य एच के पाठक के अनेक मामलों में एक और मामला जुड़ गया है, जिसमे चलती स्कूल में दो लड़कियों को ऑनलाइन क्लास से पृथक करते हुए दोनों के रिपोर्ट कार्ड को देने से मना कर दिए बच्चो के भविष्य के साथ खिलवाड़ होता देख इसकी शिकायत परिजनों ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग दिल्ली से की आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जाँच के आदेश दिए है। इस सम्बन्ध में राष्ट्रिय मानव अधिकार एवं दिल्ली लीगल सेल के प्रदेश सचिव ने शिक्षा मंत्री प्रेम सिंह टेकाम को पत्र लिखकर मामले से अवगत कराया है, पत्र में श्री सिन्हा ने कहा है की कोरबा जिले एस ई सी एल द्वारा वित्तपोषित विद्यालय डी ए वी पब्लिक स्कूल एसईसीएल कोरबा में संचालित है। यहां के प्राचार्य एच के पाठक विद्यालय प्रबंधन समिति के नामित चेयरमैन है, कोरबा क्षेत्र के ए पीएम पटनायक, प्राचार्य एच के पाठक, प्रबंधक एच सी पाडे ( प्राचार्य डी ए पी पब्लिक स्कूल एस ई सी एल कूरामूण्डा ) डी ए वी पब्लिक स्कूल एसईसीएल कोरबा द्वारा जानबूझकर शिक्षा का अधिकार कानुन का उल्लंघन किया जा रहा है। इस स्कूल में पढ़ने वाली दो बच्चियां मीना एवं सौरा श्रीवास्तव को स्कूल प्रबंधन द्वारा तानाशाही रवैया अपनाते हुए रिपोर्ट कार्ड देने से एवं ऑन लाइन शिक्षा से वंचित कर दिया गया जिसकी शिकायत पालक के द्वारा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग दिल्ली में किया गया जिसमे उन्होने त्वरित कार्यवाही करते हुए कलेक्टर कोरबा को दोनों बच्चो के शिक्षा तत्काल अबाधित रूप से प्रारंभ कराने एवं इस प्रकरण की रिपोर्ट दो हफ्ते में आयोग को देने को कहा है। बेटी बचाओ बेटी पढाओ का नारा लगाने वाले देश में सबसे महत्वपुर्ण जिस कोरबा जिले की सांसद महिला को जिस जिले की कलेक्टर महिला हो ऐसे में बच्चीयों का शिक्षा से वंचित किया जाना कोरबा के लिये शर्म की बात है।



कलेक्टर और DEO से की गयी शिकायत परिणाम सिफर रहा

श्री सिन्हा ने बताया की दोनों बच्चियों के पालक अजय कुमार श्रीवास्तव ने इस बात की शिकायत कई बार पूर्व में भी कलेक्टर कोरबा और जिला शिक्षा अधिकारी सतीश पांडे एवं कोरबा जिले में बच्चों के अधिकार पर कार्य करने वाली संस्था चाईल्ड लाईन से भी किया गया लेकिन किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया चाईल्ड लाईन द्वारा एक बार भी पालक या बच्चों से मिलना जरूरी नही समझा गया जबकी इस संस्था को महिला एवं बाल विकास से हर साल इसी काम के लिए 20 – 25 लाख रू मिलते है। पालक अजय कुमार श्रीवास्तव के द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी सतीश पांडे से स्वयं मिलकर मामले की गंभीरता को समझाया गया एवं यह भी बताया की शिक्षा में सविधान द्वारा दिया गया मौलिक अधिकार है एवं कोई भी इस अधिकार से वंचित नही कर सकता लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी सतीश पाडे द्वारा बिल्कुल गंभीरता न दिखाया जाना कोरबा के शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलतां है। जिला प्रशासनीक लापरवाही के कारण पालक को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग दिल्ली जाना पड़ा आयोग ने जिला कलेक्टर को तत्काल इसके निराकरण का निर्देश दिया एवं जाँच कर दो सप्ताह में रिपोर्ट आयोग को सौपने को कहा है।