कोरबा, 14 जून। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित मानिकपुर ओपन कास्ट माइंस (OCM) में फ्लाई ऐश (राखड़) के अनियंत्रित निपटान का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर गूंजने लगा है। पूर्व कैबिनेट मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने इस गंभीर मुद्दे को लेकर केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी को पत्र लिखकर साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के दावों पर सवाल उठाए हैं और स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग की है।
वैज्ञानिक बैकफिलिंग के नाम पर लापरवाही के आरोप
जयसिंह अग्रवाल ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि मानिकपुर खदान क्षेत्र में पर्यावरण नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से बैकफिलिंग करने के बजाय फ्लाई ऐश के बड़े-बड़े खुले ढेर बना दिए गए हैं, जिससे प्रदूषण का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
राखड़ से बढ़ रहा वायु प्रदूषण
पूर्व मंत्री ने बताया कि तेज हवाओं के चलते राखड़ के महीन कण आसपास के रिहायशी क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं। इससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि SECL द्वारा मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाती।
डेटा और ऑडिट रिपोर्ट पर उठाए सवाल
जयसिंह अग्रवाल ने सवाल उठाया कि यदि फ्लाई ऐश का निपटान वैज्ञानिक तरीके से किया जा रहा है, तो PM-10, PM-2.5 जैसे एयर क्वालिटी डेटा और किसी स्वतंत्र ऑडिट रिपोर्ट को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। उन्होंने पारदर्शिता की कमी को भी गंभीर मुद्दा बताया।
भू-जल प्रदूषण का खतरा
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि करोड़ों घनमीटर फ्लाई ऐश का इसी तरह अनियंत्रित संचयन जारी रहा, तो भविष्य में क्षेत्र का भू-जल भी दूषित हो सकता है, जिससे हजारों लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ेगा।
निष्पक्ष जांच की मांग, समिति गठन का सुझाव
पूर्व मंत्री ने केंद्रीय कोयला मंत्री से मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच के लिए पर्यावरण विशेषज्ञों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधियों की एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए। उन्होंने समिति के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करने और प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कराने की भी पेशकश की है।
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि यह केवल एक खनन परियोजना का मुद्दा नहीं, बल्कि कोरबा के हजारों नागरिकों के स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।








