Tuesday, June 30, 2026

बहन की विदाई में शामिल होगा सजायाफ्ता कैदी, हाईकोर्ट ने पुलिस अभिरक्षा में जाने की दी अनुमति

बहन की शादी में शामिल होगा कैदी, हाईकोर्ट ने पुलिस कस्टडी में जाने की दी अनुमतिबिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता देते हुए डकैती और आपराधिक साजिश के मामले में 10 साल की सजा काट रहे एक कैदी को अपनी बहन की विदाई में शामिल होने की अनुमति दी है। हालांकि अदालत ने अंतरिम जमानत देने से इनकार करते हुए उसे पुलिस अभिरक्षा में समारोह में शामिल होने की इजाजत दी है।

जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए कैदी को पुलिस सुरक्षा के बीच बहन की विदाई की रस्म निभाने का अवसर दिया जाना चाहिए।

मामले के अनुसार, भिलाई के सुपेला कृष्णानगर निवासी मनीष बंसोर को दुर्ग की विशेष अदालत ने 18 नवंबर 2025 को डकैती और आपराधिक साजिश के मामले में दोषी ठहराया था। अदालत ने उसे भारतीय न्याय संहिता के समकक्ष पुराने आईपीसी प्रावधानों के तहत धारा 120-बी में 7 वर्ष तथा धारा 397 में 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। वर्तमान में वह जेल में बंद है।

मनीष ने हाईकोर्ट में अंतरिम जमानत याचिका दायर कर बताया कि उसकी सगी बहन की शादी है और परिवार में उसके अलावा कोई दूसरा भाई नहीं है, जो पारंपरिक और सामाजिक रस्में निभा सके। इसलिए उसे कुछ दिनों की अंतरिम जमानत प्रदान की जाए।

सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी गंभीर और हिंसक अपराध में सजायाफ्ता है, इसलिए उसे खुली जमानत नहीं दी जा सकती। हालांकि राज्य की ओर से यह सुझाव भी दिया गया कि यदि न्यायालय उचित समझे तो आरोपी को पुलिस अभिरक्षा में विवाह समारोह में शामिल होने की अनुमति दी जा सकती है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत की मांग खारिज कर दी, लेकिन मानवीय आधार पर मनीष बंसोर को पुलिस सुरक्षा में बहन की विदाई में शामिल होने की अनुमति प्रदान की।

अदालत ने केंद्रीय जेल अधीक्षक और दुर्ग पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है कि 30 जून को आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था के साथ मनीष को भिलाई स्थित विवाह स्थल ले जाया जाए। विदाई की रस्में पूरी होने के बाद उसे तत्काल वापस जेल लाया जाएगा।