Monday, August 31, 2026

रखैल’ और ‘चरित्रहीन’ जैसे शब्दों पर रोक, कोर्ट के फैसलों और FIR की भाषा को लेकर नए निर्देश जारी

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की अदालतों और पुलिस की कानूनी भाषा में अब बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक दिशा-निर्देशों के बाद अदालतों के फैसलों, आदेशों और पुलिस द्वारा दर्ज की जाने वाली एफआईआर की भाषा को लेकर नए निर्देश जारी किए गए हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य महिलाओं के प्रति अपमानजनक, रूढ़िवादी और लैंगिक पूर्वाग्रह वाली भाषा के इस्तेमाल पर रोक लगाना है।

 

प्रदेश की अदालतों और संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि न्यायिक और प्रशासनिक दस्तावेज तैयार करते समय ऐसी शब्दावली से बचा जाए, जो किसी महिला के सम्मान और गरिमा को प्रभावित करती हो।

 

‘रखैल’ और ‘चरित्रहीन’ जैसे शब्दों से बचने के निर्देश

 

नए दिशा-निर्देशों में अदालतों और पुलिस की ड्राफ्टिंग में महिलाओं के लिए इस्तेमाल होने वाले अपमानजनक या रूढ़िवादी शब्दों को लेकर विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। ‘रखैल’, ‘चरित्रहीन’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल से बचने के निर्देश दिए गए हैं।

 

इसके पीछे उद्देश्य यह है कि किसी महिला के चरित्र, व्यवहार या निजी जीवन को लेकर पूर्वाग्रहपूर्ण भाषा का इस्तेमाल न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा न बने। अदालतों के आदेश और पुलिस दस्तावेज तथ्यात्मक, निष्पक्ष और सम्मानजनक भाषा में तैयार किए जाएं।

 

अदालतों के फैसलों की भाषा में भी बदलाव

 

दिशा-निर्देश केवल एफआईआर तक सीमित नहीं हैं। अदालतों के फैसलों और आदेशों में इस्तेमाल होने वाली भाषा को लेकर भी स्पष्ट मार्गदर्शन दिया गया है। न्यायिक अधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वे निर्णय लिखते समय ऐसे शब्दों और टिप्पणियों से बचें, जो लैंगिक रूढ़ियों को बढ़ावा देते हों।

 

मामले के तथ्यों और कानून पर आधारित भाषा का इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया है।

 

24 जिला एवं सत्र न्यायालयों को भेजी गई कॉपी

 

जारी निर्देशों की प्रति प्रदेश के सभी 24 जिला एवं सत्र न्यायालयों को भेजी गई है। इसके साथ ही स्टेट ज्यूडिशियल एकेडमी, राज्य एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को भी आदेश की जानकारी दी गई है।

 

प्रशासनिक स्तर पर मुख्य सचिव, गृह विभाग, पुलिस महानिदेशक (DGP) और महिला एवं बाल विकास विभाग को भी इसकी प्रति भेजकर तत्काल पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।

 

इन दिशा-निर्देशों का प्रमुख उद्देश्य न्यायिक और पुलिस व्यवस्था में संवेदनशील एवं लैंगिक रूप से निष्पक्ष भाषा को बढ़ावा देना है। एफआईआर से लेकर अदालत के अंतिम फैसले तक शब्दों का चयन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि कानूनी दस्तावेजों में इस्तेमाल भाषा का व्यापक प्रभाव पड़ता है।