Tuesday, September 1, 2026

नगर निगम की संपत्तियों की अब होगी ऑनलाइन नीलामी, एमआईसी को 15 करोड़ तक मंजूरी का अधिकार

कोरबा, 1 सितंबर। नगर पालिक निगम की संपत्तियों की नीलामी अब ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से की जाएगी। नए व्यवस्थापन नियम-2026 लागू होने के बाद निगम को संपत्तियों के व्यवस्थापन और नीलामी को लेकर अधिक अधिकार मिले हैं। नई व्यवस्था के तहत मेयर-इन-काउंसिल (एमआईसी) को 7.5 करोड़ से 15 करोड़ रुपये तक मूल्य की संपत्तियों की नीलामी को मंजूरी देने का अधिकार होगा। इससे अधिक मूल्य की संपत्ति के लिए संचालक, नगरीय प्रशासन से अनुमति लेनी होगी।

 

नए नियम लागू होने के बाद नगर निगम ने अपनी संपत्तियों की ऑनलाइन नीलामी की तैयारी शुरू कर दी है। अब भवन और जमीन के लिए मैनुअल टेंडर की पुरानी व्यवस्था की जगह ई-नीलामी और ई-ऑक्शन जैसी प्रक्रियाएं अपनाई जा सकेंगी। इसके अलावा संपत्तियों को प्रीमियम दर अथवा किराए पर देने की व्यवस्था भी की जा सकेगी।

 

पुरानी व्यवस्था में लगता था अधिक समय

 

पहले नगर निगम की संपत्तियों की नीलामी के लिए मैनुअल टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाती थी। इसके बाद एमआईसी को तीन करोड़ रुपये तक मूल्य की संपत्ति की मंजूरी देने का अधिकार था। इससे अधिक मूल्य की संपत्तियों के लिए शासन के प्रतिनिधि कलेक्टर से अनुमति लेनी पड़ती थी। अनुमति की इस प्रक्रिया में काफी समय लग जाता था।

 

नई व्यवस्था से नीलामी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने की उम्मीद है। साथ ही निगम की संपत्तियों का बेहतर उपयोग कर राजस्व बढ़ाने में भी मदद मिलने की संभावना है।

 

कॉलोनियों की जमीन और दुकानों का भी होगा व्यवस्थापन

 

नगर निगम वर्तमान में विभिन्न कॉलोनियों की जमीन और दुकानों का उपयोग कर रहा है। कॉलोनियों की जमीन और दुकानों को 30 वर्ष की लीज पर आवंटित किया जाता है, जबकि दुकानों से नियमित किराया भी वसूला जाता है।

 

नए व्यवस्थापन नियमों में पुराने व्यवसायियों के व्यवस्थापन का भी प्रावधान किया गया है। हालांकि इसका लाभ उन्हीं व्यवसायियों को मिलेगा, जो निर्धारित पात्रता पूरी करते हों और नगर निगम के नियमों का पालन कर रहे हों। किराया बकाया रखने या नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यवसायियों को व्यवस्थापन की प्रक्रिया से बाहर किया जा सकता है।

 

नगर निगम को उम्मीद है कि नई ऑनलाइन नीलामी व्यवस्था से संपत्तियों के व्यवस्थापन में पारदर्शिता बढ़ेगी और निगम की आय के नए स्रोत विकसित होंगे।