Sunday, September 13, 2026

मेडिकल स्टोर की आड़ में इलाज का खेल? बिना डिग्री इंजेक्शन लगाने का वीडियो वायरल, जांच के निर्देश

मेडिकल स्टोर बना ‘क्लिनिक’! बिना डिग्री के इलाज का VIDEO वायरल, अफसर बोले- होगी जांचगरियाबंद। जिले के अमलीपदर थाना क्षेत्र में मेडिकल स्टोर की आड़ में कथित तौर पर बिना वैध डिग्री के मरीजों का इलाज किए जाने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में मेडिकल स्टोर में एक व्यक्ति मरीज को दवा देने के बाद पीछे बने कमरे में ले जाकर इंजेक्शन लगाता दिखाई दे रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य और ड्रग विभाग हरकत में आया है। अधिकारियों ने मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।

मेडिकल स्टोर से दवा निकालकर मरीज को लगाया इंजेक्शन

वायरल वीडियो में ‘धनेश्वर मेडिकल’ नाम से संचालित एक मेडिकल स्टोर दिखाई दे रहा है। वीडियो में एक व्यक्ति मोबाइल पर बात करते हुए मेडिकल स्टोर से दवा निकालता नजर आता है। इसके बाद वह इंजेक्शन लेकर मेडिकल के पीछे बने क्लिनिकनुमा कमरे में जाता है और वहां मरीज को इंजेक्शन लगाता दिखाई देता है।

जानकारी के अनुसार, यह वीडियो अमलीपदर थाना क्षेत्र के सरनाबहाल का बताया जा रहा है। वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान धोबलेश्वर यादव के रूप में बताई जा रही है।

बिना डिग्री इलाज करने का दावा

वायरल वीडियो के आधार पर दावा किया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति के पास फार्मेसी या नर्सिंग से जुड़े आवश्यक वैध दस्तावेज नहीं हैं। यदि यह आरोप जांच में सही पाया जाता है तो मेडिकल स्टोर की आड़ में मरीजों का उपचार किए जाने का मामला गंभीर माना जा सकता है।

मेडिकल स्टोर से दवा बिक्री के अलावा मरीज को इंजेक्शन लगाते हुए वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल स्टोर की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

ड्रग इंस्पेक्टर बोले- संयुक्त जांच कमेटी बनाई जाएगी

मामले में ड्रग इंस्पेक्टर धर्मवीर ध्रुबे ने कहा कि उन्हें वायरल वीडियो की जानकारी मिली है और इसकी जांच की जाएगी। संबंधित मेडिकल स्टोर पहुंचकर पूरे मामले की जांच की जाएगी।

उन्होंने बताया कि वीडियो में इलाज करते हुए भी व्यक्ति दिखाई दे रहा है, इसलिए यह नर्सिंग एक्ट से जुड़ा मामला भी हो सकता है। इस संबंध में सीएमएचओ को अवगत कराकर संयुक्त जांच कमेटी बनाई जाएगी। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

जिले में करीब 300 मेडिकल स्टोर, ग्रामीण इलाकों में निगरानी पर सवाल

जानकारी के मुताबिक, गरियाबंद जिले में करीब 300 मेडिकल स्टोर हैं, जिनमें लगभग 60 मेडिकल स्टोर देवभोग और मैनपुर क्षेत्र में बताए जाते हैं। ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर की आड़ में कथित तौर पर इलाज किए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।

स्थानीय स्तर पर आरोप है कि कुछ जगहों पर मेडिकल स्टोर संचालक दवा बेचने के साथ मरीजों का उपचार भी करते हैं, जबकि उनके पास इलाज करने के लिए आवश्यक योग्यता या वैध दस्तावेज नहीं होते। हालांकि, इन व्यापक आरोपों की पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही हो सकेगी।

सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के बीच झोलाछापों का बढ़ता खतरा

अमलीपदर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा मिले चार साल से अधिक समय हो चुका है। क्षेत्र के करीब 70 गांवों की लगभग एक लाख आबादी इस स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर बताई जाती है। क्षेत्र में दो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 34 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं, जहां 40 से अधिक पद रिक्त होने का दावा किया गया है।

ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में डॉक्टरों तथा स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी के कारण लोगों को इलाज के लिए निजी विकल्पों पर निर्भर होना पड़ता है। ऐसे में यदि बिना योग्यता वाले लोग उपचार करते हैं तो यह ग्रामीणों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

अब वायरल वीडियो की जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि संबंधित मेडिकल स्टोर में मरीजों का इलाज किसकी अनुमति से किया जा रहा था और क्या संबंधित व्यक्ति के पास उपचार करने की वैध योग्यता है। दोष साबित होने पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई की जाएगी।