Thursday, July 30, 2026

BREAKING: ज्ञानवापी के व्यास तहखाने में पूजा पर रोक नहीं:इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुस्लिम पक्ष की आपत्ति खारिज; 31 जनवरी को पूजा शुरू हुई थी

व्यास तहखाना में भगवान शिव, हनुमान जी गणेश जी समेत कुल पांच विग्रहों की पूजा होती है।वाराणसी.वाराणसी के ज्ञानवापी तहखाने (व्यास तहखाना) में हिंदुओं का पूजा-पाठ जारी रहेगा। 26 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ये फैसला सुनाया। इससे पहले वाराणसी जिला कोर्ट ने व्यास तहखाने में हिंदुओं को पूजा करने का अधिकार दिया था। इसके बाद 31 जनवरी की रात तहखाने में पूजा शुरू हुई थी।

व्यास तहखाने में पूजा पर रोक लगाने के लिए मुस्लिम पक्ष यानी अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने याचिका लगाई थी। मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि तहखाना लंबे समय से उनके अधिकार क्षेत्र में रहा है। यह ज्ञानवापी का हिस्सा है और उसमें डीएम समेत प्रशासन ने जल्दबाजी में तत्काल पूजा शुरू करा दी, जबकि इसके लिए समय देना था। तहखाने में पूजा तत्काल रोकनी चाहिए।

जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने हिंदू और मुस्लिम पक्षों के तर्क सुनने के बाद व्यास तहखाना में पूजा को लेकर 15 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

व्यास तहखाने में वाराणसी कोर्ट के आदेश के बाद पूजा शुरू हुई थी।
व्यास तहखाने में वाराणसी कोर्ट के आदेश के बाद पूजा शुरू हुई थी।

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31 साल बाद 31 जनवरी की रात खुला था व्यास तहखाना
वाराणसी कोर्ट ने 31 जनवरी को व्यास परिवार को व्यास तहखाने में पूजा का अधिकार दिया था। कोर्ट के आदेश के करीब 8 घंटे बाद यानी रात 11 बजे ही तहखाने में स्थापित विग्रह (प्रतिमा) की पूजा की गई।3:30 बजे मंगला आरती हुई। इसके बाद सुबह से बड़ी संख्या में भक्त व्यास तहखाने में दर्शन करने पहुंचे। हालांकि, उन्होंने बैरिकैडिंग से 20 फीट दूर से दर्शन किए। तहखाने में जाने का अधिकार सिर्फ व्यास परिवार को है।

मुस्लिम पक्ष ने 31 जनवरी को ही सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल याचिका दाखिल करते हुए पूजा पर रोक की मांग की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए मुस्लिम पक्ष को पहले हाईकोर्ट जाने का सुझाव दिया था।

मुस्लिम पक्ष यानी अंजुमन इंतजामिया के वकील मुमताज अहमद ने कहा था कि व्यास तहखाना मस्जिद का पार्ट है। यह वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। इसलिए पूजा की अनुमति नहीं दी जा सकती। तहखाने में 1993 से पूजा-पाठ बंद था यानी 31 साल बाद 31 जनवरी 2024 को यहां पूजा-पाठ शुरू हुआ।

वाराणसी कोर्ट के आदेश में कहा गया कि व्यास परिवार ब्रिटिश काल से तहखाने में पूजा करता रहा है। ​​​​​​व्यास परिवार के शैलेंद्र कुमार व्यास ने ही पूजा के लिए याचिका लगाई थी। कोर्ट के आदेश में तहखाने में पूजा-पाठ करने की अनुमति सिर्फ व्यास परिवार के लिए है