Friday, October 30, 2026

CG Police Controversy: अंकिता शर्मा के बाद अब SP वायपी सिंह का वीडियो वायरल, सरकारी राइफल से फायरिंग के आरोप पर PHQ ने मांगा जवाब

रायपुर। छत्तीसगढ़ में दशहरा पर्व पर शस्त्र पूजन के बाद कथित फायरिंग को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। राजनांदगांव की पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के बाद अब मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के एसपी वायपी सिंह भी सवालों के घेरे में हैं। एसपी और उनके बेटे से जुड़ा सरकारी राइफल से कथित फायरिंग का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस मुख्यालय (PHQ) की ओर से स्पष्टीकरण मांगे जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, वायरल वीडियो की तारीख और घटना की परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।

शस्त्र पूजन के बाद फायरिंग का वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों में एसपी वायपी सिंह और उनके बेटे को शस्त्र पूजन के दौरान हथियार के साथ देखा जा सकता है। दावा किया जा रहा है कि पूजा के बाद सरकारी राइफल से फायरिंग की गई। वीडियो में एसपी के बेटे की कथित भागीदारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि सरकारी हथियार के इस्तेमाल की अनुमति किस आधार पर दी गई थी।

हालांकि, पुलिस विभाग के एक वर्ग का कहना है कि वायरल वीडियो इस साल का नहीं, बल्कि पिछले वर्ष का है। राजनांदगांव रेंज के आईजी अजय यादव के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में भी वीडियो पुराना होने की बात सामने आई है। ऐसे में वीडियो की वास्तविक तारीख और फायरिंग की परिस्थितियों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

अंकिता शर्मा के बाद दूसरे एसपी पर उठे सवाल

इससे पहले राजनांदगांव की एसपी अंकिता शर्मा का दशहरा पर शस्त्र पूजन के बाद एके-47 राइफल से फायरिंग करते हुए वीडियो वायरल हुआ था। इस मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बटोरी थी। भारतीय सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने भी फायरिंग के तरीके पर सुरक्षा संबंधी सवाल उठाए थे। इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने एसपी अंकिता शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।

विधायक इंद्रशाह मंडावी ने की निष्पक्ष जांच की मांग

मोहला-मानपुर क्षेत्र के विधायक इंद्रशाह मंडावी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, पुलिस महानिदेशक और संबंधित आईजी को पत्र लिखकर घटना की जांच कराने तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई करने की मांग की है।

वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि पुलिस अधीक्षक के बेटे को सरकारी हथियार से फायरिंग करने की अनुमति किस आधार पर दी गई। उन्होंने सरकारी हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े नियमों और अधिकारियों की जवाबदेही का मुद्दा उठाया।

BSF से राज्य पुलिस सेवा में आए थे वायपी सिंह

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एसपी वायपी सिंह का करियर सीमा सुरक्षा बल (BSF) से जुड़ा रहा है। नक्सल गतिविधियों के दौरान उनकी तैनाती राजनांदगांव क्षेत्र में भी रही थी। बाद में वे राज्य पुलिस सेवा से जुड़े और उन्हें आईपीएस का दर्जा मिला। मोहला-मानपुर क्षेत्र में वे पहले भी लंबे समय तक पदस्थ रह चुके हैं।

PHQ के जवाब मांगने की खबर, कार्रवाई पर नजर

वायपी सिंह से स्पष्टीकरण मांगे जाने की जानकारी सामने आने के बाद अब पुलिस मुख्यालय की अगली कार्रवाई पर नजर है। हालांकि, इस मामले में नोटिस जारी होने की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि स्पष्ट नहीं है।

जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि वीडियो कब बनाया गया, उसमें इस्तेमाल किया गया हथियार सरकारी था या नहीं और फायरिंग निर्धारित सुरक्षा नियमों के अनुरूप हुई थी या नहीं। फिलहाल इस वायरल वीडियो ने सरकारी हथियारों के इस्तेमाल, सुरक्षा मानकों और पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है।