Wednesday, July 1, 2026

CG Wildlife Crime: दो बाघों की खाल के साथ दो तस्कर गिरफ्तार, पैंगोलिन के शल्क भी बरामद, पुलिस विभाग से जुड़े होने की आशंका

जगदलपुर। महाराष्ट्र–छत्तीसगढ़ सीमा पर वन्यजीव तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। ऑपरेशन सेफ पैसेज के तहत उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB), वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में दो आरोपियों को दो बाघों की खाल के साथ गिरफ्तार किया गया है। कार्रवाई के दौरान पैंगोलिन के शल्क भी बरामद किए गए हैं, जिससे अंतर्राज्यीय वन्यजीव तस्करी के संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

दो बाघों की खाल के साथ दबोचे गए आरोपी

संयुक्त टीम ने महाराष्ट्र–छत्तीसगढ़ सीमा क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए बाबूराव मडावी और बिजेश्वर गेडाम को एक मोटरसाइकिल सहित गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से दो बाघों की खाल बरामद की गई। इस मामले में पश्चिम पारलकोट परिक्षेत्र, पश्चिम भानुप्रतापपुर वन मंडल (जिला कांकेर) में वन अपराध प्रकरण क्रमांक (POR) 390/09 दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

पैंगोलिन के शल्क भी मिले

जांच के दौरान आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी में पैंगोलिन के शल्क भी बरामद हुए हैं। वन विभाग के अनुसार यह बरामदगी इस बात का संकेत है कि आरोपी केवल बाघों की तस्करी ही नहीं, बल्कि अन्य दुर्लभ वन्यजीवों के अवैध कारोबार से भी जुड़े हो सकते हैं।

पुलिस विभाग से जुड़े होने की आशंका

प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि दोनों आरोपी पुलिस विभाग से जुड़े कर्मचारी बताए जा रहे हैं। साथ ही यह भी आशंका जताई गई है कि बाघों का शिकार इंद्रावती–अबूझमाड़ क्षेत्र में किया गया था। यदि जांच में इन तथ्यों की पुष्टि होती है तो मामला और भी गंभीर माना जाएगा।

टाइगर कॉरिडोर की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मामला

वन विभाग ने इस कार्रवाई को मध्य भारत के लगभग 400 किलोमीटर लंबे टाइगर कॉरिडोर की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण सफलता बताया है। अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीव अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अभियान लगातार जारी रहेगा और पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है।

फिलहाल वन विभाग, WCCB और पुलिस की संयुक्त टीम मामले की गहन जांच में जुटी हुई है। आरोपियों से पूछताछ के आधार पर तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी की जा रही है