Saturday, October 17, 2026

CGPSC Scam: टामन सिंह सोनवानी को हाईकोर्ट से झटका, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत याचिका खारिज

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की वर्ष 2020 और 2021 की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य प्रथम दृष्टया धन शोधन के अपराध में आवेदक की संलिप्तता दर्शाते हैं। अदालत के अनुसार, धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 45 के तहत जमानत देने के लिए निर्धारित शर्तें पूरी नहीं होती हैं।

इस मामले में गुरुवार को दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सोनवानी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 483 के तहत नियमित जमानत के लिए आवेदन किया था, जिसका प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विरोध किया।

CGPSC भर्ती घोटाला: जुलाई 2026 में हुई थी गिरफ्तारी

टामन सिंह सोनवानी को जुलाई 2026 में प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था। इससे पहले रायपुर की विशेष अदालत ने 20 अगस्त 2026 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।

यह मामला CGPSC की वर्ष 2020 और 2021 की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और उससे जुड़े धन शोधन के आरोपों से संबंधित है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने फरवरी 2024 में प्राथमिकी दर्ज की थी। बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भी मामले की जांच करते हुए आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र दाखिल किए।

भर्ती नियमों में बदलाव और रिश्तेदारों के चयन पर ED के आरोप

प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि सोनवानी के CGPSC अध्यक्ष रहने के दौरान भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं हुईं। एजेंसी के मुताबिक, 14 जुलाई 2021 को भर्ती नियमों में संशोधन कर परिवार की परिभाषा से ‘भतीजे’ शब्द हटा दिया गया था। ED ने आरोप लगाया कि इसके बाद सोनवानी के भतीजों नितेश सोनवानी और साहिल सोनवानी का क्रमशः डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी पद पर चयन हुआ।

हालांकि, ये आरोप जांच एजेंसी की ओर से लगाए गए हैं। इन्हें अदालत द्वारा दोष सिद्ध किए जाने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

CSR फंड और अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपये जुटाने का आरोप

ED ने आरोप लगाया है कि बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड की ओर से ग्रामीण विकास समिति को कथित शैक्षणिक परियोजना के लिए कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत 45 लाख रुपये दिए गए थे।

जांच एजेंसी का दावा है कि 33 से अधिक अभ्यर्थियों से लगभग तीन करोड़ रुपये जुटाए गए और कथित अपराध की कुल आय करीब 3.45 करोड़ रुपये थी। इन आरोपों के संबंध में एजेंसी ने जांच और अभियोजन की कार्रवाई की है।

तलाशी में नकदी और डिजिटल सामग्री जब्त करने का दावा

प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, 3 जून 2026 को की गई तलाशी के दौरान दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, डिजिटल सामग्री और 8.45 लाख रुपये नकद जब्त किए गए थे।

एजेंसी ने कथित अपराध की आय से जुड़ी कुछ संपत्तियों के संबंध में 21 सितंबर 2026 को अस्थायी कुर्की आदेश जारी किया। इसके अगले दिन, 22 सितंबर 2026 को सोनवानी समेत सात आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत भी दाखिल की गई।

बचाव पक्ष ने क्या दी दलील?

सोनवानी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील ओटवानी ने अदालत में दलील दी कि जांच एजेंसियों के पास संबंधित दस्तावेज और बैंक लेनदेन पहले से उपलब्ध हैं। बचाव पक्ष के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई है।

जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की दलीलों के साथ अभियोजन पक्ष के आरोपों पर भी विचार किया गया।

मेडिकल आधार पर जमानत की दलील भी नहीं आई काम

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी के इनकार मात्र से मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में उसकी कथित संलिप्तता की आशंका समाप्त नहीं हो जाती। अदालत ने मेडिकल आधार पर जमानत के संबंध में भी टिप्पणी की।

कोर्ट के अनुसार, इस आधार पर राहत देने के लिए ऐसे साक्ष्य आवश्यक हैं, जिनसे यह पता चले कि हिरासत में आरोपी को जरूरी उपचार नहीं मिल पा रहा है या उसकी जान को खतरा है। अदालत को रिकॉर्ड में इस संबंध में पर्याप्त मेडिकल सामग्री नहीं मिली।

PMLA की धारा 45 के तहत जमानत देने से इनकार

हाईकोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद माना कि धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 45 के तहत जमानत देने की आवश्यक शर्तें पूरी नहीं होती हैं। इसी आधार पर टामन सिंह सोनवानी की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी गई।

इस फैसले से CGPSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सोनवानी को फिलहाल राहत नहीं मिली है। मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना बाकी है।